जेसीपीओए के तहत अगले 60 दिन में ईरान का अगला क़दम!
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने परमाणु समझौते जेसीपीओए के 36वें अनुच्छेद के तहत उठाए गए दूसरे क़दम की ओर इशारा करते हुए बल दिया कि ये सभी क़दम तीन योरोपीय देश ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं के पालन की स्थिति में वापस हो जाएंगे।
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने रविवार को अपने ट्वीटर हैंडल पर तेहरान की ओर से परमाणु समझौते जेसीपीओए के संबंध में योरोपीय पक्षों को उनकी प्रतिबद्धताओं पर अमल के लिए 60 दिन की दी गयी मोहलत की समाप्ति और ईरान द्वारा इस समझौते के 36वें अनुच्छेद के तहत उठाए गए दूसरे क़दम की ओर इशारा करते हुए बल दिया कि ये सभी क़दम तीन योरोपीय देश ब्रिटेन, फ़्रांस और जर्मनी द्वारा अपनी प्रतिबद्धताओं के पालन की स्थिति में वापस हो जाएंगे। ईरान ने 60 दिन की अवधि की समाप्ति पर जेसीपीओए के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने के दूसरे क़दम के तहत एलान किया कि वह युरेनियम संवर्धन का स्तर 3.67 प्रतिशत से आगे ले जाएगा। इसी तरह ईरान ने इस बात की भी चेतावनी दी कि अगर जेसीपीओए के अन्य पक्षों ने अपनी प्रतिबद्धताओं पर अमल न किया तो ईरान 60 दिन बाद तीसरा क़दम उठाएगा।
विदेश नीति व अंतर्राष्ट्रीय अधिकार के माहिर रज़ा नसरी का कहना है कि पिछले एक साल में अमरीकी पाबंदियों से निपटने के मार्ग में सबसे बड़ी रुकावट, योरोप के मन में इस बात का डर है कि कहीं अमरीका के साथ उसके संबंध प्रभावित न हो जाएं जो 75 साल से उसके साथ जारी हैं। योरोप को लगता है कि अमरीका के मुक़ाबले में आने से उसके साथ संबंध नए चरण में पहुंच जाएगा और यह नया चरण उनके लिए अभी अस्पष्ट और जोखिम से भरा है।
ईरान ने योरोप की वादाख़िलाफ़ी के जवाब में उन्हें 60 दिन का अवसर देकर अपनी नियत स्पष्ट कर दी है लेकिन ऐसा लगता है कि योरोप के पास संकल्प की कमी है। ऐसा लगता है कि ईरान को अत्यधिक दबाव के सामने झुकाने के लिए एक तरह से योरोप और अमरीका ने आपस में काम बांट लिए हैं। ऐसे हालात में ईरान के लिए जेसीपीओए के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को कम करने के लिए अधिक ठोस क़दम उठाना बहुत ज़रूरी लगता है। (MAQ/T)