ईरानी तेल टैंकर को रोकना अमरीका पर ब्रिटेन की निर्भरता का सूचक
ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने जबलुत तारिक़ या जिब्राल्टर स्ट्रेट में 5 जुलाई को ईरान के तेल टैंकर को रोकने के ब्रिटिश नौसैनिकों के क़दम को अमरीका पर उसकी निर्भरता का चिन्ह बताया।
ब्रिटिश नौसेना ने इस बहाने से ईरान के तेल टैंकर को रोका कि उसने योरोप के ख़िलाफ़ योरोपीय संघ की पाबंदियों का उल्लंघन किया है।
ईरानी विदेश मंत्री ने ब्रिटेन के इस दावे को रद्द करते हुए मांग की कि जल्द से जल्द ईरान के तेल टैंकर को छोड़ा जाए ताकि वह आगे का मार्ग तय कर सके।
ब्रितानी सरकार ने ऐसी स्थिति में ईरान के तेल टैंकर को रुकवाया है कि इस टैंकर ने नवपरिवहन के किसी भी क़ानून का उल्लंघन नहीं किया है, बल्कि इसे रोकने के पीछे राजनैतिक कारण है। इस घटना के पीछे अमरीका का हाथ है। अमरीका ने अपने भूभाग से दूर पाबंदी के हथकंडे को इस्तेमाल करते हुए ब्रिटिश सरकार को ईरान के तेल टैंकर को रोकने का आदेश दिया। जैसा कि स्पेन के विदेश मंत्री जोज़फ़ बोरल ने इस घटना के होने के आरंभिक घंटों में ही कहा था कि ब्रिटिश नौसेना ने अमरीका के कहने पर जबलुत तारिक़ स्ट्रेट में ईरान के तेल टैंकर को रोका है।
ब्रिटेन का राजनैतिक खेल यह दर्शाता है कि यह देश अब जबकि योरोपीय संघ से अलग हो रहा है, पहले से ज़्यादा अमरीका पर निर्भर है। अपने भूभाग से दूर पाबंदी को लागू करने से कि जिसका योरोपीय संघ विरोध करता है, अमरीका के साथ ब्रिटेन के सहयोग का पता चलता है।
यह पहली घटना नहीं है जब ब्रिटेन ने ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका का साथ दिया है, बल्कि जब ईरान में मुसद्दिक़ की सरकार ने तेल उद्योग का राष्ट्रीयकरण किया था, उस समय भी ब्रिटेन ईरान की तत्कालीन सरकार के तेल बेचने के क़दम में रुकावट बना था।
ब्रिटेन का यह क़दम परमाणु समझौते जेसीपीओए को बचाने के उसके राजनैतिक दृष्टिकोण से समन्वित नहीं है। जेसीपीओए का बाक़ी रहना इस समझौते में ईरान के आर्थिक हितों की रक्षा पर निर्भर है और ईरान के तेल का बिकना इस समझौते का आधार बिन्दु है।
ब्रिटिश सरकार ने अपनी नई गतिविधियों से यह दर्शा दिया है कि वह जेसीपीओए में अपनी प्रतिबद्धताओं के तहत तेल बेचने में ईरान की मदद करने के बजाए ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका का साथ दे रही है, जिसने ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ आर्थिक आतंकवाद की नीति अपना रखी है। (MAQ/T)