ईरान के मुक़ाबले में अमरीका की बेबसी की एक और मिसाल
अमरीकी वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को ईरानी विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ को उन लोगों की सूचि में शामिल किया है जिस पर उसने पाबंदियां लगायी हैं।
अमरीकी वित्त मंत्रालय ने यह दावा किया कि ईरानी विदेश मंत्रालय तेहरान की अस्थिर करने वाली गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए कवरेज देता है।
इसके साथ ही अमीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने दावा किया कि ईरानी विदेश मंत्रालय तेहरान की विध्वंसक नीतियों को आगे बढ़ाता है।
पाबंदी, अत्यधिक दबाव और धमकी ट्रम्प सरकार के ईरान से मुक़ाबला करने के तीन हथकंडे हैं। अमरीका ने ये हथकंडे परमाणु समझौते जेसीपीओए से वाइट हाउस के निकलने के बाद से अपनाए हैं।
आंतरिक स्तर पर ईरान की सैद्धांतिक व सामंजस्यपूर्ण नीति और ट्रम्प सरकार की विध्वंसक व एकपक्षीय नीतियों की ओर से विश्व स्तर पर जनमत को जागरुक बनाने में उसके असर ने, अमरीकी राजनेताओं को ईरान के ख़िलाफ़ बंद गली में पहुंचा दिया है।
ईरानी विदेश मंत्री के हालिया न्यूयॉर्क सफ़र में सक्रिय कूटनीति और अमरीकी मीडिया के साथ उनके इंटरव्यू से कि जिससे ईरानी राष्ट्र के ख़िलाफ़ ट्रम्प सरकार का दोमुखी व्यवहार दुनिया वालों के सामने स्पष्ट हो गया, अमरीका के मुक़ाबले में मीडिया व संकल्प की जंग में ईरान विजयी हुआ है।
अमरीकी विदेश मंत्री के इस दावे के साथ कि ईरान के साथ वार्ता का मार्ग खुला है, अमरीकी वित्त मंत्रालय के ज़रीफ़ पर पाबंदी लगाने के क़दम से, दुनिया वालों के सामने एक बार अमरीकी व्यवहार में विरोधाभास और ईरान के मुक़ाबले में उसकी बौखलाहट स्पष्ट हो गयी है।
ज़रीफ़ पर पाबंदी से एक बार फिर साबित हो गया कि विश्व स्तर पर ईरान की कूटनीति प्रभावी रही और उसने सभी क्षेत्र में ट्रम्प सरकार के सामने चुनौती खड़ी कर दी है।
इस बारे में पूर्व अमरीकी राष्ट्रपति ओबामा की सरकार में ईरान के ख़िलाफ़ पाबंदियां लगाने के ज़िम्मेदार रिचर्ड नेफ़्यू ने ट्रम्प सरकार के आर्थिक युद्ध कक्ष की ईरानी विदेश मंत्री पर पाबंदी की कार्यवाही को हास्यास्पद बताते हुए कहा कि इस क़दम का ज़रीफ़ की कूटनीति पर तनिक भी असर नहीं पड़ेगा। (MAQ/T)