ईरान-जापान संबंध
ईरान-जापान संबंध कितना अहम
राष्ट्रपति हसन रुहानी जल्द ही जापान का दौरा करने वाले हैं। उनका यह दौरा, जापान के प्रधान मंत्री के ईरान दौरे के बाद अहम समझा जाता है।
इसी परिप्रेक्ष्य में तेहरान में जापान के राजदूत और ईरान के उपविदेश मंत्री अब्बास इराक़ची के बीच बैठक हुयी।
ईरान और जापान के क्षेत्र की स्थिरता व सुरक्षा में संयुक्त हित हैं। ईरान के उपविदेश मंत्री ने इसी संबंध में अभी हाल में जापान का दौरा किया था जहां उन्होंने जापान के विदेश मंत्री तोशीमित्सू मोतेगी से भेंटवार्ता में परमाणु समझौते जेसीपीओए और ईरानी राष्ट्रपति द्वारा संयुक्त राष्ट्र महासभा में पेश की गयी हुर्मुज़ शांति योजना पर चर्चा हुयी।
एक बड़ी आर्थिक व राजनैतिक शक्ति के रूप में जापान का दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि टोक्यो जेसीपीओए पर पाबंदी और क्षेत्र में स्थिरता व सुरक्षा की अहमियत को अच्छी तरह समझता है। इसी लिए जापान की नज़र में ईरान का क्षेत्र में स्थिरता बनाए रखने और क्षेत्र के आर्थिक व राजनैतिक समीकरण में उसका प्रभावी रोल जापान के लिए बहुत अहमयित रखता है क्योंकि, पश्चिमी एशिया में जापान के अपने हित हैं। दुनिया में जापान तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और वह ईरान के ऊर्जा बाज़ार की अनदेखी नहीं कर सकता।
जेसीपीओए के ख़िलाफ़ वाइट हाउस की अतार्किक कार्यवाही और ईरान के ख़िलाफ़ उसकी ओर से बढ़ती पाबंदियां यह दर्शाती हैं कि वाइट हाउस के अधिकारी अंतर्राष्ट्रीय हितों को कोई अहमियत नहीं देते। अमरीका की प्रभुत्व जमाने की नीति की वजह से अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को भारी क़ीमत चुकानी पड़ी है। इसलिए अमरीका की ओर से क़ानून व नियमों के उल्लंघन का तर्कपूर्ण जवाब, स्वाधीन नीति अपनाना है।
जैसा कि इस्लामी क्रान्ति के वरिष्ठ नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा ख़ामेनई ने 13 जून को तेहरान का दौरा करने वाले जापानी प्रधान मंत्री से मुलाक़ात में कहा था कि अगर आप ईरान के साथ संबंध बनाना चाहते हैं तो मज़बूत इरादे का परिचय दें जैसा कि इस संबंध कुछ देश अपना इरादा ज़ाहिर कर चुके हैं। (MAQ/T)