ईरान जनता का पक्का उसूल, अमरीका जो कहे उसके ठीक उलटा करो!
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इस्लामी गणतंत्र ईरान में ग्यारहवें संसदीय चुनाव का 21 फरवरी शुक्रवार को आयोजन हुआ। ईरान में निरंतरता के साथ चुनाव आयोजन वास्तव में एक गौरव है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb २२, २०२० १५:२० Asia/Kolkata
  • ईरान जनता का पक्का उसूल, अमरीका जो कहे उसके ठीक उलटा करो!

इस्लामी गणतंत्र ईरान में ग्यारहवें संसदीय चुनाव का 21 फरवरी शुक्रवार को आयोजन हुआ। ईरान में निरंतरता के साथ चुनाव आयोजन वास्तव में एक गौरव है।

संसदीय चुनाव के अंतर्गत 290 सांसदों के चुनाव के लिए 208 चुनावी क्षेत्रों में मतदान हुआ। 208 चुनावी क्षेत्रों में लगभग 55 हज़ार मतदान केंद्र बनाए गए थे जहां सात हज़ार 157 प्रत्याशियों के बीच मुक़ाबला हुआ।  

ईरान में संसदीय चुनाव के पहले चरणों में औसत मतदान 60 प्रतिशत रहा है। ईरान में इस्लामी क्रांति की सफलता के 41 वर्षों के दौरान 37 चुनावों का आयोजन हुआ है जो निश्चित रूप से एक बहुत बड़ा कारनामा है विशेषकर इस लिए भी कि ईरान जिस पश्चिम एशिया में स्थित है वहां अधिकांश देशों में चुनाव और मतदान जैसी चीज़ों का कोई अर्थ ही नहीं है।

इन हालात में ईरान में निंरतर मतदान होता है किंतु अमरीका  ईरान को निशाने पर रखता है और ईरान में चुनाव की राह में बाधाएं खड़ी करता है और सऊदी अरब जैसे देशों की मदद से यह काम करता है जहां प्रजातंत्र और मतदान का नाम व निशान तक नहीं।

अमरीकी विचारक नोवाम चाम्स्की कहते हैं कि पश्चिम में सब लोग प्रजातंत्र से प्रेम की बात करते हैं लेकिन आप सब को मालूम है कि पश्चिमी लोग जो कहते हैं उसमें विश्वास नहीं रखते। प्रजातंत्र पश्चिमी शक्तियों के लिए बहुत बड़ा खतरा है और उसका कारण भी बहुत साधारण है। अरब जगत में हुए सर्वे का परिणाम देख लें। उदाहरण स्वरूप ब्रोकिंग्स संस्था के सर्वेक्षण के अनुसार अरब जगत में लोग सब से अधिक घृणा अमरीका और इस्राईल से करते हैं।"

इस्लामी गणतंत्र ईरान में चुनाव राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक महत्व और उपयोगिता रखता है। यही वजह है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान के दुश्मन हर बार ईरानी जनता को चुनाव से दूर रखने की कोशिश करते हैं और हर बार ईरानी जनता उन्हें नाकाम बनाती है। ईरानी जनता ने हमेशा यह साबित किया है कि वह संवेदनशील परिस्थितियों में अधिक चेतना के साथ मैदान में उपस्थित रहती है।