अमरीकी ग़ुंडागर्दी का मिलकर मुक़ाबला करेंगे, ईरान, चीन और रूस
अंतर्राष्ट्रीय मामलों में "अमरीकी ग़ुंडागर्दी" का मुक़ाबला करने लिए चीन और रूस ने खुलकर और मज़बूती से ईरान का साथ देने का फ़ैसला किया है।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के मुताबिक़, चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपने रूसी समकक्ष सर्गेई लावरोव के साथ टेलीफ़ोन पर बातचीत में एकजुट होकर अमरीकी दबाव का मुक़ाबला करने पर ज़ोर दिया।
वांग का कहना था कि ट्रम्प "अमरीका फ़र्स्ट" की नीति को आगे बढ़ा रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय मामलों में दूसरे देशों पर धौंस जमाने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहाः वाशिंगटन, बीजिंग के साथ शीत युद्ध वाली अपनी पुरानी मानसिकता के साथ व्यवहार कर रहा है और वह जानबूझकर वैचारिक टकराव को हवा दे रहा है।
चीनी विदेश मंत्री का कहना था कि चीन और रूस को न केवल अपने द्विपक्षीय सहयोग को उच्च स्तर पर ले जाना चाहिए, बल्कि ईरान समेत सभी उन देशों के साथ खड़ा होना चाहिए जो अमरीकी ग़ुंडागर्दी का निशाना बन रहे हैं।
बीजिंग की यह कड़ी प्रक्रिया ऐसे समय में सामने आई है, जब हांगकांग में चीन द्वारा नया राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लागू करने और ईरान के साथ 25 वर्षीय रणनीतिक साझेदारी को लेकर दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच टकराव चल रहा है।
इससे एक दिन पहले ही ईरानी राष्ट्रपति हसन रूहानी ने अपने रूसी समकक्ष व्लादिमिर पुतिन के साथ टेलीफ़ोन पर बातचीत के दौरान, अमरीकी एकपक्षीय नीतियों के ख़िलाफ़ ज़रूरी कार्यवाही पर बल दिया था।
शुक्रवार को यूरोपीय संघ ने भी एक बयान जारी करके व्हाइट हाउस द्वारा अमरीका के तथाकथित दुश्मन देशों के साथ व्यापार करने वाले देशों के ख़िलाफ़ वाशिंगटन की प्रतिबंधों की नीति की कड़ी आलोचा की।
यूरोपीय संघ के विदेश मामलों के प्रमुख जोसेफ़ बोरेल का कहना था कि प्रतिबंधों के अधिक इस्तेमाल या प्रतिबंधों की धमकियों से यूरोपीय कंपनियों को नुक़सान पहुंच रहा है, जो क़ानूनी रूप से व्यापार करना चाहती हैं।
बोरेल के इस बयान से दो दिन पहले ही अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने यूरोप में रूस की दो गैस पाइप लाइनों की परियोजना को अमरीकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल करने का एलान किया था। msm