इस समय आईएईए के महानिदेशक की ईरान यात्रा की अहमियत
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी आईएईए के महानिदेशक सोमवार को ईरान की यात्रा कर रहे हैं जिसमें वे कई ईरानी उच्चाधिकारियों से वार्ता करेंगे।
रफ़ाएल ग्रोसी का, जिन्हें अमरीका ने आईएईए के प्रमुख की कुर्सी तक पहुंचाया है, कहना है कि वे ईरान का दौरा इस लिए कर रहे हैं ताकि उनके अपने शब्दों में "सेफ़गार्ड के हल न हो पाने वाले मामलों" के बारे में बात करें। इस बात पर थोड़ा सा ध्यान देने और इसी तरह कुछ ही दिन पहले अमरीकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से होने वाली उनकी मुलाक़ात को दृष्टिगत रख कर उनकी इस यात्रा के लक्ष्यों की समीक्षा आसान हो जाती है। आईएईए की ताज़ा रिपोर्ट में जो ईरान पर अंतर्राष्ट्रीय दबावों में वृद्धि के परिप्रेक्ष्य में जारी की गई, कुछ नए सवाल किए गए हैं और कुछ नए स्थानों का नाम लिया गया है जिनका निरीक्षण किया जाना चाहिए।
ऐसी स्थिति में जब वाइट हाउस में भी और पश्चिमी एशिया के क्षेत्र में भी ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो ईरान को अमरीका की सबसे बड़ी समस्या बताते हैं और उसे सबसे ज़्यादा प्राथमिकता देते हैं, लगता है कि ग्रोसी का यह दौरा भी चाहे-अनचाहे में इस खेल का हिस्सा है। यह ऐसी हालत में है कि जब एक तरफ़ जनमत और दूसरी तरफ़ इलाक़े के हालात और साथ ही कोरोना, आर्थिक संकट और चुनाव की समस्या जैसी अमरीका की आंतरिक मुश्किलें वास्तव में अमरीका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प की समस्याओं में सबसे ऊपर होनी चाहिए।
ईरान के मामले में अमरीका लगभग हर चीज़ आज़मा चुका है। वह परमाणु समझौते से निकल गया, उसने ईरान के ख़िलाफ़ प्रतिबंधों को अत्यंत कड़ाई से लौटा दिया, ईरान पर लगे हथियार संबंधी प्रतिबंधों की समय सीमा बढ़वाने की हर संभव कोशिश की और आज कल ट्रिगर मेकेनिज़म के इस्तेमाल की धमकी दे रहा है। अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा के महानिदेशक की तेहरान यात्रा को कुछ लोग इसी सिलसिले की एक कड़ी मान रहे हैं लेकिन इस बारे में कुछ कहना अभी जल्दबाज़ी है।
ग्रोसी अपनी इस यात्रा से न तो अमरीका के अगले चुनाव में ट्रम्प के वोट बढ़ा सकेंगे और न ही इस्राईल के साथ अरबों के संबंध स्थापित किए जाने की ओर से विश्व जनमत का ध्यान हटा पाएंगे बल्कि इस दौरे से उन्हें सिर्फ़ और सिर्फ़ थकन और निराशा हाथ लगेगी। परमाणु मामले में इस्लामी गणतंत्र ईरान की सैद्धांतिक नीति एक व अटल है जो "तर्कसंगत व दुश्मनी व दुष्टता रहित सहयोग की छाया में अपने परमाणु अधिकारों पर आग्रह" पर आधारित है। (HN)
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