अरब सरकारों को ज़ायोनी शासन की रक्षा का साधन समझता है अमरीका
ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह ख़ामेनई ने इस्राईल की गोद में जा बैठने की अरब सरकारों की लालसा पर अलग अलग अवसरों पर टिप्पणियां की हैं इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं
ग़द्दार अरब सरकारों को यह जान लेना चाहिए कि अमरीका भरोसे के लायक़ नहीं है। अमरीका इन सरकारों को ज़ायोनी शासन की रक्षा के साधनों के रूप में देखता है।
1 अगस्त 2016
मुस्लिम जनता ज़ायोनी शासन के साथ शर्मनाक शांति समझौतों को हरगिज़ बरदाश्त नहीं करेगी। अमरीकी अगर इस भूल में हैं कि मध्यपूर्व के मुद्दों को इस रूप में हल कर लेंगे तो वह बहुत बड़ी ग़लती कर रहे हैं। उन्हें याद रखना चाहिए कि जो भी सरकार ज़ायोनी शासन के साथ वार्ता की मेज़ पर बैठी अपनी जनता की नज़रों से गिर जाएगी और इलाक़े में अस्थिरता बढ़ेगी, जनता अपने रास्ते पर आगे बढ़ रही है जबकि विपरीत मार्ग पर चलने वाली सरकारों का वही अंजाम होगा जो कैंम्प डेविड वार्ता में शामिल नेताओं का हुआ।
31 जूलाई 1991
अल्लाह और उसके नेक बंदों की लानत हो उस हाथ पर जिसने इस्राईल के साथ पहले शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए और अपनी दुनिया की ज़िंदगी और अपने अंजाम को फ़िरऔन के समान बना लिया। अल्लाह के नेक बंदों, पैग़म्बरों और दूतों की लानत हो उन लोगों पर जो इसी रास्ते पर अग्रसर हैं। ख़ास तौर पर उन लोगों पर जिन्होंने फ़िलिस्तीनी राष्ट्र को झूठी उम्मीद दिलाई मगर उन्हें मुसीबतों के अंधेरे में ढकेल कर अपने लिए क्षणिक विलास हासिल किया।
4 जून 1990
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