क्या अमरीका, ईरान को S-400 ख़रीदने से रोक सकेगा?
लाख कोशिशों के बावजूद, ईरान के ख़िलाफ़ अमरीका संयुक्त राष्ट्र संघ के हथियारों के प्रतिबंधों को आगे बढ़ाने में नाकाम रहा है, जिनकी अवधि 18 अक्तूबर को ख़त्म हो जाएगी।
अमरीका की नाकामी का एक स्पष्ट सुबूत यह है कि ईरान और रूस, वायु रक्षा प्रणाली S-400 की ख़रीदारी के समझौते के काफ़ी निकट पहुंच गए हैं।
मास्को का कहना है कि 18 अक्तूबर को राष्ट्र संघ का प्रतिबंध हटने के बाद, तेहरान को हथियार बेचने में उसे कोई दिक्क़त नहीं है।
रूसी अधिकारियों का कहना है कि मास्को, वाशिंगटन की धमकियों से नहीं डरता है और अपने सहयोगी देशों से वह जो वादा करता है, उसे हर हालत में निभाता है।
परमाणु समझौते से निकलने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में मुंह की खाने के बाद, अमरीका के पास अब कोई ऐसा क़ानूनी विकल्प नहीं है, जिसके आधार वह ईरान को दूसरे देशों से हथियारों की ख़रीदारी या दूसरे देशों को हथियार बेचने से रोक सके।
S-400 एक ऐसी आधुनिक वायु रक्षा प्रणाली है, जो क्रूज़ और बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ आसमान में उड़ने वाली किसी भी वस्तु को रेडियो जैमिंग की स्थिति में भी ध्वस्त कर सकता है। इसे दुनिया की सबसे आधुनिक रक्षा प्रणालियों में से एक माना जाता है। इसे हवा में एक साथ दर्जनों लक्ष्यों को निशाना बनाने के अलावा, ज़मीन पर स्थित लक्ष्यों को ध्वस्त करने के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
रूस यह प्रणाली तुर्की, बेलारूस और चीन समेत कई अन्य देशों को बेच चुका है, लेकिन नई दिल्ली और बीजिंग के बीच तनाव बढ़ने के बाद, मास्को ने बीजिंग को S-400 की आपूर्ति रोक दी है, ताकि दोनों मित्र देशों के बीच निष्पक्षता बनाए रख सके।
ईरान ने ख़ुद भी कई वायु रक्षा प्रणालियों को विकसित कर लिया है और S-300 पहले ही रूस से ख़रीद चुका है। लेकिन S-400 मिलने के बाद, अमरीका और पश्चिम के आधुनिक विमानों और मिसाइलों को निशाना बनाने की उसकी क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। msm