क्या सच में अलक़ाएदा का नंबर-2 ईरान में मारा गया?
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न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने एक काल्पनिक-थ्रिलर थीम वाली कहानी के माध्यम से दावा किया है कि तीन महीने पहले तेहरान में जिस लेबनानी पिता व उसकी बेटी की हत्या कर दी गई थी, वह आतंकी गुट अलक़ाएदा का नंबर-2 था और उसके साथ उसामा बिन लादेन की बहू थी। इस ख़बर के प्रकाशित होते ही सऊदी मीडिया ने सबसे ज़्यादा इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना शुरू कर दिया।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov १४, २०२० १८:५७ Asia/Kolkata
  • क्या सच में अलक़ाएदा का नंबर-2 ईरान में मारा गया?

न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ने एक काल्पनिक-थ्रिलर थीम वाली कहानी के माध्यम से दावा किया है कि तीन महीने पहले तेहरान में जिस लेबनानी पिता व उसकी बेटी की हत्या कर दी गई थी, वह आतंकी गुट अलक़ाएदा का नंबर-2 था और उसके साथ उसामा बिन लादेन की बहू थी। इस ख़बर के प्रकाशित होते ही सऊदी मीडिया ने सबसे ज़्यादा इसे बढ़ा-चढ़ा कर पेश करना शुरू कर दिया।

हालांकि ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने इस दावे को ख़ारिज कर दिया और इसे हाॅलीवुड स्टाइल में पेश की गई एक कहानी बताया और राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की नाकामी के बाद सऊदी मीडिया की तरफ़ से इस तरह का रवैया अप्रत्याशित नहीं था लेकिन इस संबंध में दो अहम सवाल पाए जाते हैं जिन पर ध्यान देने की ज़रूरत हैः

पहली बात तो यह कि अगर मान भी लिया जाए कि यह बात सही है और इस तरह की घटना हुई है तो इसे अब यानी घटना के तीन महीने बाद क्यों मीडिया में उछाला जा रहा है? और विशेष कर अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प की हार के बाद? ट्रम्प जो पिछले चार साल में ईरान के ख़िलाफ़ दबाव के लिए छोटे से छोटे अवसर को भी हाथ से नहीं जाने देते थे, किस तरह संभव है कि ईरान में ज़ायोनियों की इस बड़ी कार्यवाही से फ़ायदा उठाने से चूक जाते? जो ट्रम्प एक रिट्वीट को भी, जिसमें दावा किया गया था कि बिन लादेन मरा नहीं है, अपने चुनावी लाभ के लिए इस्तेमाल करने से नहीं चूके, क्या वह इतनी बड़ी और इतनी अहम घटना को आसानी से यूंही छोड़ देते?

 

दूसरी बात यह कि किस तरह इस्राईली मीडिया, जो हमेशा यह कोशिश करता है कि ईरान में किसी भी तरह की गड़बड़ और विध्वसं को इस देश में ज़ायोनी एजेंटों का काम और इस्राईल की ताक़त की निशानी बताए, इस संबंध में चुप बैठा रहा? क्या बेनी गेन्ट्ज़ के मुक़ाबले में नेतनयाहू की जर्जर स्थिति के मद्देनज़र न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ ही की तरह इस्राईली मीडिया भी इस तरह के दावे करके नेतनयाहू की मदद की कोशिश नहीं कर सकता?

 

ऐसा प्रतीत होता है कि न्यूयाॅर्क टाइम्ज़ की यह रिपोर्ट अगर सऊदी अरब और इस्राईल के ऑर्डर पर तैयान न की गई हो तब भी कम से कम रियाज़ व तेल अवीव के लिए इतना लाभ तो रखती है कि वे ईरान को क्षेत्र व संसार के लिए ख़तरे के तौर पर पेश करते रहने की अपनी आख़री कोशिशें करते रहें और इस तरह अमरीका के नए राष्ट्रपति की अहम प्राथमिकताओं में ईरान के ख़तरे को शामिल करवा दें। (HN)

 

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