पश्चिम और ईरान में शक्ति के तत्वों से मुक़ाबले का सपना
https://parstoday.ir/hi/news/iran-i92949-पश्चिम_और_ईरान_में_शक्ति_के_तत्वों_से_मुक़ाबले_का_सपना
अगर ईरान की मीज़ाइल प्रतिरोधक शक्ति न होती तो अमरीका व ज़ायोनी शासन एक पल के लिए भी ईरान पर हमला करने में संकोच न करते। यही प्रतिरोधक शक्ति है जिसने अमरीका की सबसे पागल सरकार को नियंत्रित कर रखा है और नेतनयाहू जैसे अपराधी व आतंकी को लगाम लगा रखी है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec ०७, २०२० १८:१४ Asia/Kolkata
  • पश्चिम और ईरान में शक्ति के तत्वों से मुक़ाबले का सपना

अगर ईरान की मीज़ाइल प्रतिरोधक शक्ति न होती तो अमरीका व ज़ायोनी शासन एक पल के लिए भी ईरान पर हमला करने में संकोच न करते। यही प्रतिरोधक शक्ति है जिसने अमरीका की सबसे पागल सरकार को नियंत्रित कर रखा है और नेतनयाहू जैसे अपराधी व आतंकी को लगाम लगा रखी है।

अगर कोई यह सोचता है कि अमरीका की विदेश नीति इस देश के राष्ट्रपति के दलगत संबंधों के आधार पर निर्धारित होती है तो यह बड़ी बचकाना सोच है। यह देश कभी भी अपने राष्ट्रपति की रुचि व रुझान के अनुसार अपनी नीति को नहीं बदलता, विशेष कर जब इस्राईल का मामला हो क्योंकि अमरीका में जब भी को राष्ट्रपति बनता है तो अपने से पहले वालों से ज़्यादा इस शासन की सेवा करने की कोशिश करता है और अमरीका की सभी संभावनाएं ज़ायोनी शासन के समर्थन और उसके दुश्मनों से मुक़ाबले में झोंक देता है। अमरीका के कुछ राष्ट्रपति तो इस हद तक पहुंच गए कि उन्होंने अपने देश के हितों को इस्राईल के हितों पर प्राथमिकता दी।

 

पिछले चालीस बरसों से इस्लामी गणतंत्र ईरान से अमरीका के राष्ट्राध्यक्षों की दुश्मनी चाहे वे डेमोक्रेटिक पार्टी के हों या रिपब्लिकन पार्टी के, इस बात का प्रमाण है। अमरीका की इस नीति में उसके यूरोपीय व अरब घटक भी उसका भरपूर साथ देते हैं। जर्मनी के विदेश मंत्री ने कुछ ही दिन पहले कहा है कि परमाणु समझौते में विस्तार होना चाहिए और इसमें ईरान के मीज़ाइल कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय भूमिका को भी शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब कि ऐसा नहीं हो जाता तब तक परमाणु समझौते में नहीं लौटना चाहिए। यह ऐसी हालत में है कि जब जर्मनी, इराक़ द्वारा ईरान पर थोपे गए 8 वर्षीय युद्ध में सद्दाम शासन को सबसे ज़्यादा रासायनिक हथियार बेचने वाला देश था। इराक़ी तानाशाह सद्दाम ने इन हथियारों को ईरान के शहरों पर अंधाधुंध इस्तेमाल किया जिनमें हज़ारों आम नागरिक मारे गए जिनमें निहत्थे बच्चे और महिलाएं भी थीं।

 

थोपे गए युद्ध के बरसों के कटु अनुभव और किसी भी देश द्वारा ईरान को अपनी रक्षा के लिए एक भी मीज़ाइल न बेचे जाने के मद्देनज़र तेहरान ने अपने सपूतों की शक्ति व क्षमता के सहारे कम से कम समय में मीज़ाइल कार्यक्रम शुरू करने की कोशिश की और इस तरह ईरान पर सैन्य हमले के अमरीका व इस्राईल के सपने को हमेशा के लिए चकनाचूर कर दिया। अपनी मीज़ाइल ताक़त की बरकत से ईरान ने शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम भी शुरू कर दिया और इसी ताक़त के सहारे वह पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो गया। यही कारण है कि अमरीका व ज़ायोनी शासन ने अत्यंत तुच्छ हथकंडे अपना कर ईरान की वैज्ञानिक प्रगति को रोकने की कोशिश की और इसके लिए ईरान के वैज्ञानिको। की हत्याएं शुरू कर दीं।

 

दुनिया का साधारण से साधारण इंसान भी जानता है कि अगर ईरान की मीज़ाइल प्रतिरोधक शक्ति न होती तो अमरीका व इस्राईल एक पल के लिए भी ईरान पर हमला करने में संकोच न करते और उस पर तुरंत हमला कर देते। ईरानी की मीज़ाइली ताक़त ही है जिसने ट्रम्प की जुनूनी और आतंकी सरकार को नियंत्रित कर रखा है और नेतनयाहू जैसे आतंकी व अपराधी को लगाम लगा दी है। इसी तरह जर्मन विदेश मंत्री हाइको मास जैसे दोग़ले नेताओं और अन्य यूरोपीय पक्षों को लगाम लाई है जिन्हें विदित रूप से परमाणु समझौते पर दस्तख़त किए हैं लेकिन व्यवहारिक रूप से ईरान की शक्ति को ख़त्म करने की साज़िशें कर रहे हैं। (HN)

 

ताज़ातरीन ख़बरों, समीक्षाओं और आर्टिकल्ज़ के लिए हमारा फ़ेसबुक पेज लाइक कीजिए!

हमारा व्हाट्सएप ग्रुप ज्वाइन करने के लिए क्लिक कीजिए

हमारा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब कीजिए!

ट्वीटर पर हमें फ़ालो कीजिए