ईरान के मुक़ाबले में अमरीका की एक और पराजय
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जेसीपीओए से ट्रम्प प्रशासन को एक और झटका लगा है जिसके कारण उसे फिर पराजय का मुंह देखना पड़ा है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec ३१, २०२० १५:१६ Asia/Kolkata
  • ईरान के मुक़ाबले में अमरीका की एक और पराजय

जेसीपीओए से ट्रम्प प्रशासन को एक और झटका लगा है जिसके कारण उसे फिर पराजय का मुंह देखना पड़ा है।

संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा की पांचवी समिति ने अमरीका के जेसीपीओए विरोधी प्रस्ताव को रद्द कर दिया जिसके कारण ट्रम्प प्रशासन को सन 2020 के अन्तिम दिनों में एक और चोट पहुंची है।

अमरीका ने राष्ट्रसंघ के 2021 के बजट में 2 अनुच्छेद बढ़ाने का प्रयास किया जिसका 142 देशों ने विरोध किया।  इन अनुच्छेदों के माध्यम से ईरान के विरुद्ध प्रतिबंधों की समिति को पुनर्जीवित करने की कोशिश  की जा रही थी। अमरीकियों का यह कहना था कि राष्ट्रसंघ की प्रतिबंधों वाली समिति को चाहिए कि वह ईरान के विरुद्ध अपना काम आरंभ करे क्योंकि अमरीका अब जेसीपीओए से निकल चुका है।  इस हिसाब से वाशिगटन अब जेसीपीओए का हिस्सा नहीं है।  अमरीका के विरोध में 110 देश आए और 32 देशों ने वोटिंग मेंं भाग नहीं लिया।

संयुक्त राष्ट्रसंघ में इस्लामी गणतंत्र ईरान के प्रतिनिधि इस्हाक़ आले हबीब ने अमरीका के इस काम को राजनीति से प्रेरित बताया।  उन्होंने जेसीपीओए या परमाणु समझौते को बहुपक्षीय कूटनैतिक समझौता बताते हुए कहा कि प्रस्ताव क्रमांक 2231 सर्वसम्मति से पारित हुआ था।ईरान के प्रतिनिधि का कहना था कि इस प्रस्ताव के आधार पर सुरक्षा परिषद की ओर से ईरान पर लगाए गए प्रतिबंध समाप्त हो गए। 

उन्होंने बल देकर कहा कि अमरीकी काम का कोई भी क़ानूनी आधार नहीं है।  आले हबीब ने सवाल किया कि क्या राष्ट्रसंघ की महासभा के लिए वैध है कि वह उस काम के लिए बजट बनाए जिसका सुरक्षा परिषद विरोध कर चुकी है।

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