ईरान ने दोस्ती का हक़ अदा कर दियाः क़तर
क़तर का कहना है कि प्रतिबंधों के दौरान ईरान ने जिस प्रकार से हमारा साथ दिया उसे हम कभी भी नहीं भूलेंगे।
क़तर के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता "अलख़ातिर" ने कहा है कि वैसे तो तुर्की और ईरान के साथ हमारे संबन्ध बहुत अच्छे हैं किंतु प्रतिबंधों के दौरान ईरान ने जिस तरह से हमारा साथ दिया वह प्रशंसनीय है। उन्होंने कहा कि हम इस्लामी गणतंत्र के आभारी है कि उसने प्रतिबंधों के दौरान हमारा हर प्रकार से साथ दिया। इससे पहले क़तर के विदेशमंत्री मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी भी कह चुके हैं कि ईरान, क्षेत्र का ही एक भाग है। उन्होंने कहा कि वह हमारा पड़ोसी है। उनका कहना था कि ईरान के साथ हमारी संयुक्त सीमाएं हैं।
हालांकि सऊदी अरब के साथ भी क़तर की सीमाएं मिलती हैं किंतु इसमें कितना अंतर है यह क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री के बयान से साफ हो जाता है। क़तर के पूर्व प्रधानमंत्री "हम्द बिन जासिम" कह चुके हैं कि सऊदी अरब और ईरान दोनों ही हमारे पड़ोसी है लेकिन ईरान एसा देश है जो किसी के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करता।
सऊदी अरब का पड़ोसी होने के बावजूद क़तर और सऊदी अरब के संबन्ध पिछले साढ़े तीन वर्षों से बहुत ही तनावपूर्ण रहे हैं। यह तनाव क़तर के आंतरिक मामलों में सऊदी अरब के हस्तक्षेप के कारण पैदा हुआ था। सऊदी अरब, क़तर पर दबाव डाल रहा था कि वह अपनी विदेश नीति को बदलकर उसके आदेशानुसार चलाए। दोनो पक्षों के बीच तनाव का अंदाज़ा इस बात से लगाया जा सकता है कि सन 2017 में सऊदी अरब ने क़तर पर हमला करने की ठान ली थी।
जैसाकि क़तर के विदेश मंत्रालय की ओर से एलान किया गया है कि ईरान के साथ हमारे संबन्ध बहुत अच्छे हैं तो यह बात अस्ल में ईरान की विदेश नीति का परिणाम है। इस संबन्ध में एक यूनिवर्सिटी प्रोफेसर डाक्टर "केहान बुज़ुर्ग" कहते हैं कि क्षेत्रीय देशों के साथ सहयोग, ईरान की विदेश नीति का मूल सिद्धांत है जिसके सकारात्मक परिणाम देखे जा सकते हैं।
एक राजनैतिक टीकाकार का कहना है कि क़तर की ओर से ईरान की सराहना इसलिए स्वागत योग्य है क्योंकि ईरान ने क़तर के साथ जो कुछ भी किया वह स्वयं प्रतिबंध झेलने के दौरान किया। ईरान दशकों से प्रतिबंधों का मुक़ाबला कर रहा है। इस बीच ट्रम्प प्रशासन के दौरान यह प्रतिबंध अपने चरम पर पहुंच चुके थे। इसके बावजूद ईरान ने क़तर का दर्द समझते हुए उसपर थोपे गए प्रतिबंधों के दौरान इतनी अधिक सहायता की जिससे जवाब में क़तर को कहना पड़ा कि वास्तव में ईरान ने दोस्ती का हक़ निभा दिया।