आज़रबाइजान प्रांत ईरान का मज़बूत क़िला है, इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता
29 बहमन 1356 अर्थात 18 फ़रवरी 1978 को ईरान के तबरेज़ की जनता द्वारा किए ऐतिहासिक आंदोलन की वर्षगांठ पर इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़्मा सैयद अली ख़ामनेई ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए तबरेज़ की जनता को संबोधित किया।
ईरान की इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता ने विदेशियों और अलगाववादियों के हमलों के ख़िलाफ़ आज़रबाइजान प्रांत को ईरान का मज़बूत क़िला क़रार दिया।
29 बहमन को तबरेज़ की जनता के आंदोलन की वर्षगांठ के अवसर पर आज़रबाइजान प्रांत के लोगों को वीडियो कांफ़्रेंसिंग के ज़रिए संबोधित करते हुए सर्वोच्च नेता आयतुल्लाहिल उज़मा सैय्यद अली ख़ामेनई ने कहाः आज़रबाइजान विदेशी हमलों के मुक़ाबले में ईरान का मज़बूत क़िला रहा है, अर्थात हमें हमेशा से ही हमलावर और आक्रामक पड़ोसियों का सामना रहा है, चाहे वह रूस का त्सार और पूर्व उस्मानी साम्राज्य हो या सोवियत संघ हो। क्योंकि अगर आज़रबाइजान नहीं होता, तबरेज़ नहीं होता, जनता का प्रतिरोध नहीं होता, मुक़ाबला नहीं होता और क़ुर्बानियां नहीं होतीं तो संभवतः यह हमले देश के केन्द्रीय इलाक़ों तक पहुंच जाते। आज़रबाइजान मज़बूत बांध और क़िला रहा है, जिसने इन हमलों का जवाब दिया है और उन्हें रोका है।
हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने आगे फ़रमायाः तबरेज़ और आज़रबाइजान के इलाक़े की पहचान की दो विशेषताएं हमेशा और स्थायी रही हैं, पहली विशेषता इस्लाम से गहरा लगाव और दूसरी ईरान के प्रति अधिक उत्साह और समर्थन है। विभिन्न दौर में आज़रबाइजान में यह विशेषताएं रही हैं। वहां के लोगों ने इस्लाम और ईरान को अतना ज़्यादा महत्व दिया और उसका समर्थन किया कि वास्तव में यह एक ऐसी विशिष्टता बन गई, जिसने ईरान के विभाजन की साज़िश करने वाली विदेशी शक्तियों का मुक़ाबला किया और देश की अखंडता की हिफ़ाज़त की।
सर्वोच्च नेता ने ईरानी जनता को रजब के महीने की मुबारकबाद पेश करते हुए कहाः मुझे आशा है कि सभी इस महीने की बरकतों से लाभान्वित होंगे। ठीक है कि इस महीने में सामूहिक कार्यक्रम नहीं होंगे और हर साल की तरह इस साल इबादत और आध्यात्मिक आयोजन नहीं हो रहे हैं, लेकिन घरों में रजब की विशेष दुआएं पढ़ना नहीं भूलें, और ऐसा न हो कि अस्थायी रूप से इन आयोजनों का नहीं होना, हमें इस महीनें की बरकतों, इबादतों और दुआओं से वंचित कर दे।
इस्लामी क्रांति के सर्वोच्च नेता का कहना था कि अगर दूसरा पक्ष परमाणु समझौते पर अमल करेगा तो हम भी उस पर अमल करेंगे और इस बार ईरान सिर्फ़ वादों और बातों पर भरोसा नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि साम्राज्यवादी शक्तियां मानवाधिकार, इस्लामी नियम, परमाणु मुद्दा, मिसाइल और दूसरे बहानों से साज़िशें करती हैं, लेकिन इस बात पर ध्यान देने की ज़रूरत है कि यह मुद्दे सिर्फ़ एक बहाना हैं।