अधिकतम दबाव की नीति, अधिकतम विफल रही है, ज़रीफ़
ईरान के विदेश मंत्री मोहम्मद जवाद ज़रीफ़ ने प्रेस टीवी के साथ इंटरव्यू में कहा है कि तेहरान ने ऐतिहासिक परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने के लिए बातचीत का रास्ता खुला रखा है, लेकिन यह उसी वक़्त संभव होगा, जब समझौते में शामिल सभी पक्ष अपने दायित्वों को पूरा करना शुरू कर देंगे।
रविवार को ज़रीफ़ ने कहा कि अमरीकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने पूर्ववर्ती डोनल्ड ट्रम्प की ईरान नीति को ज़बानी तौर पर तो ठुकरा दिया है, लेकिन अभी तक व्यवहारिक रूप से उसी नीति का अनुसरण किया है।
ग़ौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन ने मई 2018 में परमाणु समझौते से निकलने के एलान कर दिया था और उसके बाद तथाकथित अधिकतम दबाव की नीति के तहत ईरान कड़े प्रतिबंध लगा दिए थे।
ट्रम्प का दावा था कि वह इससे बेहतर समझौते के लिए ईरान को वार्ता की मेज़ पर लाने के लिए दबाव बना रहे हैं, हालांकि उनकी यह नीति विफल हो गई, क्योंकि ईरान ने ट्रम्प प्रशासन से किसी भी तरह की बातचीत के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था।
ज़रीफ़ का कहना था कि अमरीका को प्रतिबंध लगाने, दादागिरी करने और दबाव डालने की लत सी लग गई है। हमारे पास भी एक वैश्विक साम्राज्य था, जो अमरीका के इतिहास से अधिक समय तक बाक़ी रहा था।
उन्होंने कहा कि यह स्पष्ट हो चुका है कि ईरान दबाव के सामने नहीं झुकता है और उनकी अधिकतम दबाव की नीति अधिकतम विफल रही है। msm