ईरान और चीन ने अमरीकी प्रयासों को बनाया विफलः वाॅल स्ट्रीट जर्नल
अमरीकी पत्रिका द वाॅ स्ट्रीट जर्नल ने लिखा है कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान चीन, ईरान के महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में उभरा है।
वाल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख प्रकाशित हुआ है। इस लेख में कहा गया है कि ईरान और चीन ने व्यापक सहयोग के समझौते पर हस्ताक्षर करके अमरीका द्वारा उनको अलग-थलग किये जाने के प्रयास को पूरी तरह से विफल बना दिया है।
लेख के अनुसार इस दस्तावेज़ में दोनों देशों के बीच व्यापारिक, आर्थिक और परिवहन के क्षेत्र में सहयोग के सभी आयाम को मद्देनज़र रखा गया है इसलिए अब तेहरान और बीजिंग को सबसे दूर करने की अमरीकी नीति दम तोड़ती दिखाई दे रही है।
लेखक एंगल रासमुसेन के अनुसार एसे समय में कि जब प्रतिबंधों के कारण ईरान अपनी अर्थव्यवस्था को मज़बूत करना चाहता है यह समग्र समझौता उसके लिए बहुत सहायक सिद्ध होगा। अब चीन, ईरान से प्रतिदिन 9 लाख 18 हज़ार बैरेल तेल आयात करेगा जो पिछले दो वर्षो में प्रतिबंधों के बाद चीन की ओर से तेल आयात करने का सबसे बड़ा आंकड़ा है। ईरान और चीन के बीच होने वाला समझौता यह स्पष्ट संदेश देता है कि तेहरान के पास अब एक एसा मज़बूत सहयोगी है जो सुरक्षा परिषद का स्थाई सदस्य है।
शनिवार को तेहरान में ईरान और चीन के विदेश मंत्रियों ने 25 वर्षीय व्यापक साझेदारी के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। यह समझौता ईरान-चीन के बीच एक रोडमैप की तरह है जिससे दोनों देशों के संबंध सामान्य स्तर से रणनैतिक आयाम ले सकते हैं। यह समझौता विभिन्न आयाम पर आधारित संपूर्ण रोडमैप है जिसमें राजनैतिक, आर्थिक और रणनैतिक अनुच्छेद हैं।
इस दस्तावेज़ में ईरान तथा चीन दोनों देशों के बीच व्यापारिक, आर्थिक और परिवहन के क्षेत्रों में सहयोग के सभी आयामों को दृष्टिगत रखा गया है। इसी तरह इस समझौते में दोनों पक्षों के निजी क्षेत्रों में सहयोग पर विशेष रूप से ध्यान दिया गया है। ईरान और चीन के बीच हुए इस समझौते को अब विश्व में अमरीका और यूरोप के वर्चस्व की समाप्ति के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। राजनीतिक हल्क़ों में यह भी कहा जा रहा है कि ईरान और चीन के बीच 25 वर्षीय व्यापक साझेदारी के समझौते ने अमरीका की नींद उड़ा दी है।
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