रमज़ान के बाद इस्राईल को किन चुनौतियों का सामना है?
इस्राईल में सैन्य और सुरक्षा गलियारों का मानना है कि हाल ही में ज़ायोनी सेना और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधियों के बीच होने वाली झड़पों के कारण, पवित्र रमज़ान का महीना ख़त्म होने के बाद ज़ायोनी शासन के सामने एक कठिन चरण है और उसे मल्टी फ़्रंट पर लड़े जाने वाले किसी भी संभावित युद्ध को टालने का हर संभव प्रयास करना चाहिए।
रमज़ान के महीने में ज़ायोनी सैनिकों ने मस्जिदुल अक़सा में घुसकर फ़िलिस्तीनियों के साथ मारपीट की थी और सैकड़ों लोगों को गिरफ़्तार कर लिया था।
मुसलमानों के तीसरे सबसे पवित्र धार्मिक स्थल के इस अनादर के बाद, इस्लामी प्रतिरोधी गुटों में रोष था, जिसके जवाब में ग़ज्ज़ा पट्टी और लेबनान से अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों में रॉकेट दाग़े गए थे।
इस्राईल के टीवी चैनल 12 ने लेबनान से दाग़े जाने वाले रॉकेटों का उल्लेख करते हुए कहा हैः अब रमज़ान के बाद इस्राईल को एक ख़तरनाक और जटिल स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए। क्योंकि रमज़ान के बाद, रणनीतिक रूप से हमास मल्टी फ़्रंट पर ख़ुद को बहुत ज़्यादा मज़बूत करेगा, जिससे इलाक़े में खेल पलट भी सकता है।
हालिया दिनों में हमें इस्राईल की रक्षात्मक शक्ति के बारे में काफ़ी चर्चा सुनने को मिली है। हालांकि इससे पहले तक इस्राईल की रक्षात्मक और आक्रामक शक्ति को अभेद समझा जाता था, लेकिन 2006 में हिज़्बुल्लाह और ज़ायोनी शासन के बीच 33 दिवसीय युद्ध के बाद, इलाक़े में शक्ति का संतुलन काफ़ी हद तक बदल गया और इस्राईल की अभेद समझे जाने वाली रक्षात्मक शक्ति की पोल खुल गई।
2021 में हमास के साथ टकराव में भी इस्राईली सैन्य शक्ति की कई कमज़ोरियां खुलकर सामने आईं और अब हालत यह है कि इस्राईल, ग़ज्ज़ा स्थित फ़िलिस्तीनी प्रतिरोधी गुटों से टकराने से पहले भी कई बार सोचता है।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान हमने किसी भी टकराव में देखा है कि पलक झपकते ही विभिन्न दिशाओं से सैकड़ों रॉकेट अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ों का रुख़ करते हैं, जिसका मुक़ाबला करना ज़ायोनी सेना के बस की बात नज़र नहीं आती है।
ज़ायोनी शासन को एक दूसरी सबसे बड़ी चिंता, लेबनान और फ़िलिस्तीन के प्रतिरोधी मोर्चों के बीच समन्वय की है, जो दिन प्रति दिन मज़बूत होता जा रहा है। इस्राईली अधिकारियों का मानना है कि अब झड़पों और लड़ाईयों के समीकरण बदल चुके हैं और फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध को अन्य इस्लामी प्रतिरोधी मोर्चों से अलग करके रखना, लगभग असंभव हो चुका है।