ज़ायोनियों का फ़्लैग डे और एक नया युद्ध भड़कने का ख़तरा
अवैध अधिकृत इलाक़ों में पहले से ही माहौल तनावपूर्ण है और हालिया दिनों में फ़िलिस्तीनियों और ज़ायोनी शासन के बीच झड़पें देखने को मिली हैं। इसके बावजूद, फ़्लैग डे के बहाने एक बार फिर ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीनियों को उकसाने की कोशिश की है, जिससे एक नया युद्ध भड़कने की संभावना बढ़ गई है।
गुरुवार को बड़ी संख्या में ज़ायोनी मस्जिदुल अक़सा के परिसर में इकट्ठा होना शुरू हो गए थे, ताकि 1967 में पूर्वी बैतुल मुक़द्दस पर ज़ायोनी शासन के होने वाले क़ब्ज़े का जश्न मना सकें। अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीनी इलाक़ो में बसने वाले ज़ायोनी पूर्वी बैतुल मुक़द्दस पर ज़ायोनी क़ब्ज़े के दिन को फ़्लैग डे के रूप में मनाते हैं।
गुरुवार को जैसे ही यह मार्च शुरू हुआ, अल्ट्रानेशनलिस्ट ज़ायोनियों ने फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ अपमानजनक और उकसाने वाले नारे लगाने शुरू कर दिए और कई जगहों पर उन्हें निशाना बनाया। विगत में भी इस मार्च के दौरान ज़ायोनियों ने बड़े पैमाने पर हिंसा की है और फ़िलिस्तीनियों को उकसाने के प्रयास किए हैं। इस मार्च में शामिल होने वाले ज़ायोनी अकसर अरब मुर्दाबाद और फ़िलिस्तीनी मुर्दाबाद जैसे अपमानजनक नारे लगाते हैं।
दर असल, 14 मार्च 1948 को अवैध ज़ायोनी शासन के गठन की घोषणा की गई थी, जिसे फ़िलिस्तीनी नकबा डे के रूप में मनाते हैं। उसी समय ज़ायोनियों ने बैतुल मुक़द्दस शहर के पश्चिमी भाग पर पूर्ण रूप से क़ब्ज़ा कर लिया था, लेकिन पूर्वी हिस्सा जॉर्डन के ही निंयत्रण में बाक़ी रहा। 1967 में इस्राईल और अरब देशों के बीच 6 दिवसीय युद्ध के दौरान, ज़ायोनी शासन ने पूर्वी हिस्से पर भी क़ब्ज़ा कर लिया। उसके बाद से ज़ायोनी 18 मई को फ़्लैग डे के रूप में मनाते हैं और इस ख़ुशी में मार्च निकालते हैं।
वास्तव में ज़ायोनी इस बहाने मुसलमानों के तीसरे सबसे पवित्र धार्मिक स्थल मस्जिदुल अक़सा की पहचान बदलना चाहते हैं और बैतुल मुक़द्दस का यहूदीकरण करना चाहते हैं। इसी मक़सद से वे अपने मार्च को बैतुल मुक़द्दस के पुराने भाग से और बाबुल आमूद से गुज़ारते हैं और फिर मस्जिदुल अक़सा के परिसर में एकट्ठे होकर नारेबाज़ी और उछल-कूद करते हैं।
इसके मुक़ाबले में फ़िलिस्तीनी मस्जिदुल अक़सा और बैतुल मुक़द्दस शहर की मूल पहचान बाक़ी रखने पर ज़ोर देते हैं और इसके लिए ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ प्रतिरोध करते हैं। गत वर्षों के विपरीत, इस साल फ़िलिस्तीन में माहौल बहुत ज़्यादा तनावपूर्ण है, क्योंकि अभी ज़ायोनी शासन और ग़ज्ज़ा पट्टी के बीच पांच दिवसीय युद्ध समाप्त हुआ है। लेकिन अगर स्थिति इसी तरह से तनावपूर्ण रहती है और ज़ायोनियों की उकसाने वाली कार्यवाहियां जारी रहती हैं तो एक नया युद्ध भड़क उठेगा, जो निश्चित रूप से इस्राईल को काफ़ी मंहगा पड़ेगा।