हिज़्बुल्लाह ने ताक़त दिखाई, इस्राईल की नींद हुई हराम
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह ने रविवार को दक्षिणी लेबनान की आज़ादी की 23वीं वर्षगांठ की पूर्व संध्या पर लेबनान की धरती की रक्षा के लिए प्रतिरोध की तैयारी का प्रदर्शन करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर सैन्य अभ्यास किया।
25 मई 2000 को ज़ायोनी शासन को लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध आंदोलन हिज़्बुल्लाह के प्रतिरोध से मुंह की खाने के बाद लज्जाजनक पराजय का सामना करना पड़ा जिसके परिणामस्वरूप इस्राईली सेनाएं दक्षिणी लेबनान से पीछे हटने पर मजबूर हुईं इसीलिए इस दिन को लेबनान में "प्रतिरोध की ईद" के रूप में मनाया जाता है।
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध ने दक्षिणी लेबनान में और अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन की सीमा पर अपनी तकनीकी और सैन्य क्षमताओं का एक छोटा सा हिस्सा प्रदर्शित किया। इस अभूतपूर्व सैन्य अभ्यास के कवरेज के लिए सैकड़ों पत्रकार मौजूद थे।
लेबनान के इस्लामी प्रतिरोध ने इस सैन्य अभ्यास का शीर्षक था "हम कर गुजरेंगे, और हम कर गुज़र रहे हैं"। इस सैन्य अभ्यास से इस्लामी प्रतिरोध ने अतिग्रहणकारी ज़ायोनी शासन को कई महत्वपूर्ण संदेश दिए हैं।
इस अभ्यास को 650 से अधिक पत्रकारों, मीडिया हस्तियों और लेबनानी और विदेशी फोटोग्राफरों ने कवरेज दिया जो उनके लिए बहुत ही रोमांचक दिन था।
मीडिया कर्मियों ने हिज़्बुल्लाह की मीडिया इकाई के निमंत्रण पर इस सैन्य युद्धाभ्यास में भाग लिया जिसमें किसी भी टकराव की स्थिति में पूरी तैयारी का प्रदर्शन पेश किया गया है।
इस सैन्य अभ्यास में जिसे कई लोग ज़ायोनी शासन के लिए एक चेतावनी के रूप में देख रहे हैं, अपनी क्षमताओं का केवल एक छोटा सा हिस्सा दिखाया गया। इस सैन्य अभ्यास के दौरान हल्के वाहनों पर लगे एंटी-टैंक मिज़ाइल, विभिन्न रेंज और आकार के रॉकेट लॉन्चर्स, बक्तरबंद वाहन जैसे कई प्रकार के हथियार और ड्रोन विमानों का प्रदर्शन किया गया।
ज़ायोनी मीडिया ने इस बारे में कहा कि इस युद्धाभ्यास में जिन हथियारों का प्रदर्शन नहीं किया गया, वह पॉइंट-लॉन्चिंग मिज़ाइल हैं और सबसे मुख्य और अहम समस्या यही है कि पॉइंट-लॉन्चिंग मिज़ाइल का अनावरण न किए जाने का मक़सद, सुरक्षा और सैन्य संस्थानों कीकी नज़रों से बचाना है।
इस युद्धाभ्यास में अवैध अधिकृत उत्तरी फ़िलिस्तीन में घुसने और जलील क्षेत्र पर नियंत्रण की भी प्रैक्टिस की गयी जो ज़ायोनियों का सबसे बड़ा दुःस्वप्न है। इस सैन्य अभ्यास में हिज़्बुल्लाह की स्पेशल यूनिट "रिज़वान" के लड़ाके इस्राईली हल्क़ों के ध्यान का केन्द्र रहे हैं जो विशेष वर्दी पहने बक्तरबंद गाड़ियों पर अपने चेहरों पर मास्क पहने बैठे नज़र आए। रिज़वान ब्रिगेड के सैनिकों तैयारी देखकर ज़ायोनी हल्क़े बुरी तरह बौखला गये और इस्राईल की ओर से अनेक प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। (AK)
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