ग़ज़्ज़ावासियों से हार के बाद इस्राईल का अगला प्लान क्या है?
संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष रिपोर्टर ने बुधवार को कहा कि ग़ज़्ज़ा की जनता का जबरन स्थानांतरण और विस्थापन "नरसंहार" है और उन्होंने अन्य देशों को ऐसी कार्रवाई में भाग न लेने पर सचेत किया है।
संयुक्त राष्ट्र संघ के विशेष रिपोर्टर बालाकृष्णन राजगोपाल ने एक्स सोशल नेटवर्क पर लिखा है कि ग़ज़्ज़ा की आबादी का जबरन स्थानांतरण, विशेष रूप से बच्चों की बड़ी संख्या को देखते हुए, एक प्रकार का नरसंहार है।
उन्होंने चेतावनी दी यदि कांगो के अधिकारी या अन्य देश किसी भी जनसंख्या हस्तांतरण के लिए सहमत होते हैं तो वे इस नरसंहार में भागीदार होंगे।
संयुक्त राष्ट्र संघ का रुख़ और ग़ज़्ज़ावासियों के जबरन प्रवास के बारे में चेतावनियों पर अधारित कुछ रिपोर्टें एसी हालत में सामने आई हैं कि जब इस्राईली अधिकारियों की ओर से ग़ज़्ज़ावासियों को संभावित क़बूल करने के लिए अफ्रीकी देश कांगो और कई अन्य देशों के साथ गुप्त बातचीत का मुद्दा सामने आया है।
7 अक्टूबर को तूफ़ान अल-अक्सा ऑपरेशन के बाद, ज़ायोनी शासन ने ग़ज़्ज़ा पट्टी पर अभूतपूर्व हवाई और जमीनी हमले किए जिसके कारण ग़ज़्ज़ा की मज़लूम जनता की बड़े पैमाने पर हत्या हुई और फिलिस्तीनी बुनियादी ढांचे और घर नष्ट हो गए।
इन तीन महीनों में ग़ज़्ज़ा पट्टी में जो 22,000 से अधिक लोग शहीद हुए हैं, उनमें 8,000 बच्चे हैं। इसके अलावा ज़ायोनी शासन के आक्रमण की वजह से ग़ज़्ज़ा की जनता विस्थापित हुई है।
फ़िलिस्तीनी शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की राहत और कार्य एजेंसी (यूएनआरडब्ल्यूए) ने पहले घोषणा की थी कि 17 लाख फ़िलिस्तीनी ग़ज़्ज़ा पट्टी के उत्तर और केंद्र से विस्थापित हुए हैं और इस क्षेत्र के दक्षिण में घरों और शिविरों में रह रहे हैं जो स्वयं भी घनी आबादी वाला इलाक़ा है।
ज़ायोनी शासन ने वादा किया था कि अपने वर्तमान सैन्य अभियान में, वह ग़ज़्ज़ा पट्टी में हमास और अन्य फिलिस्तीनी प्रतिरोध समूहों की समस्या का समाधान करेगा और साथ ही वह ग़ज़्ज़ा से तथाकथित खतरों की समस्या का स्थायी समाधान करेगा।
अब ग़ज़्ज़ा युद्ध को लगभग तीन महीने बीत चुके हैं, ग़ज़्ज़ा के कुछ हिस्सों पर कब्जा करने के बावजूद, इस्राईल को प्रतिरोधकर्ता गुट को नष्ट करने में कोई सफलता नहीं मिली है और फिलिस्तीनी जियाले ज़ायोनी सैनिकों और उनके बख्तरबंद वाहनों पर घातक प्रहार करने में सक्षम हैं।
ग़ज़्ज़ा मुद्दे के तथाकथित अंतिम समाधान के संदर्भ में ज़ायोनी शासन के अधिकारी, विशेष रूप से प्रधान मंत्री बिन्यामीन नेतन्याहू, अपने मंत्रिमंडल के चरम मंत्रियों यानी आंतरिक सुरक्षा मंत्री और वित्त मंत्री के साथ ग़ज़्ज़ा से फिलिस्तीनियों का निष्कासन चाहते हैं। ज़ायोनी प्रधानमंत्री और उनके कट्टरपंथी मंत्रीमंडल को ग़ज़्ज़ा पर सैन्य चढ़ाई का कोई फ़ायदा हासिल नहीं हो सका है और यह इस्राईल की सबसे बड़ी नाकामी है। (AK)
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