अब्दुल्लाह सालेह ईरानी मूल के हैं! इमारात का विचित्र दावा
संयुक्त अरब इमारात के एक शासक ने यमन के पूर्व राष्ट्रपति अली अब्दुल्लाह सालेह को ईरानी मूल का बताया है।
यमन में क्रांति की सफलता से पहले तक फ़ार्स की खाड़ी के तटवर्ती अरब देशों की नीतियों का भरपूर साथ देने के कारण अली अब्दुल्लाह सालेह को उनका पूरा पूरा समर्थन प्राप्त था लेकिन अब यमन में अरब देशों के अपराधों के विरुद्ध नीति अपनाने और अंसारुल्लाह जनांदोलन का साथ देने के कारण उन्हें ईरानी मूल का बताया जा रहा है। शारजा के शासक सुल्तान बिन मुहम्मद अलक़ासेमी ने शारजा टीवी से बात करते हुए कहा है कि इस्लाम के आगमन से पहले कुछ ईरानी किंदा क़बीले के साथ हो गए थे और उन्होंने शासन हथियाने में सफलता प्राप्त कर ली थी। इसके बाद वे यमन में रुक गए और अब भी यमन में ही हैं। उन्होंने अपने हास्यास्पद दावे में कहा है कि ईरानी इन लोगों को अपनी संतान कहते थे जिसका मतलब यह है कि ये लोग फ़ार्स मूल के हैं। उन्होंने कहा कि इसके बाद किंदा क़बीला सिन्हान के क्षेत्र में जा कर बस गया और ईरानी इस क़बीले का समर्थन करते रहे और चूंकि अली अब्दुल्लाह सालेह का संबंध सिन्हान क़बीले से है इस लिए वे भी ईरानी मूल के हैं।
इमारात के अधिकारी इस प्रकार के बयान दे कर यमन में अपनी पराजय पर पर्दा डालने की कोशिश कर रहे हैं। यमन में जारी युद्ध में अब तक संयुक्त अरब इमारात के दसियों सैनिक मारे जा चुके हैं। गत सितम्बर में यमन के स्वयं सेवियों की जवाबी कार्यवाही में इमारात के रासुल ख़ैमा के शासक के पुत्र अहमद बिन सुऊद अलक़ासेमी अपनी दोनों टांगें गंवा चुके हैं और अब व्हील चेयर पर बैठने पर विवश हैं। (HN)