इसराइली सेना में संकट; 100 सैनिकों ने बैरक छोड़ा
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पार्सटुडे – एक ज़ायोनी मीडिया ने 100 ज़ायोनी सैनिकों द्वारा अवज्ञा और बैरक छोड़ने की सूचना दी है।
(last modified 2026-07-31T10:43:53+00:00 )
Jul ३१, २०२६ १६:१२ Asia/Kolkata
  • इसराइली सेना में संकट; 100 सैनिकों ने बैरक छोड़ा

पार्सटुडे – एक ज़ायोनी मीडिया ने 100 ज़ायोनी सैनिकों द्वारा अवज्ञा और बैरक छोड़ने की सूचना दी है।

पार्सटुडे की रिपोर्ट के अनुसार 'यिसराइल हायोम' अखबार ने गुरुवार को बताया कि 'गिवाती' ब्रिगेड के 100 इसराइली सैनिकों ने अपने बटालियन कमांडर के साथ विवाद के बाद 'सदे तेमान' हिरासत केंद्र (डिटेंशन सेंटर) छोड़ दिया।

 

इस रिपोर्ट के अनुसार इन सैनिकों ने बैरक छोड़ते समय अपने हथियार भी पीछे छोड़ दिए।

 

इस इसराइली मीडिया ने विवाद के कारण या इस कदम के परिणामों के बारे में अधिक विवरण प्रकाशित नहीं किया है।

 

इससे पहले ज़ायोनी पत्रकारों और विश्लेषकों ने अपने अभूतपूर्व आकलनों में सैन्य क्षमता के क्षरण, अभूतपूर्व अंतरराष्ट्रीय अलगाव, गहरे सामाजिक विभाजन, प्रतिरोध क्षमता के कमज़ोर होने और आंतरिक वैधता संकट को तेल अवीव के युद्ध-उन्माद के सबसे महत्वपूर्ण परिणाम बताया था।

 

ज़ायोनी शासन के टेलीविज़न चैनल 12 की रिपोर्ट के अनुसार इस चैनल के सबसे प्रतिष्ठित पत्रकारों और विश्लेषकों ने "इसराइल अब वह पुराना इसराइल नहीं रहा" शीर्षक वाले एक विशेष नोट में क्षेत्र में लंबे समय तक युद्ध-उन्माद के परिणामों की एक अभूतपूर्व तस्वीर पेश की – एक ऐसी तस्वीर जो इस शासन के सर्वांगीण क्षरण, अंतरराष्ट्रीय वैधता में कमी, सामाजिक और राजनीतिक संकटों तथा इसराइल की सैन्य शक्ति की सीमाओं को दर्शाती है।

 

इस चैनल की वरिष्ठ विश्लेषक 'दाना वाइस' ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद के घटनाक्रमों का ज़िक्र करते हुए कहा:

 

"ज़ायोनी शासन की सुरक्षा सिद्धांत जो हमेशा अल्पकालिक, अपरिहार्य और समर्थन-प्राप्त युद्धों पर आधारित था अब अपनी जगह सात मोर्चों पर 1000 दिनों के युद्ध को दे चुका है; एक ऐसा युद्ध जो बिना किसी स्पष्ट रणनीति के जारी है।"

 

वाइस ने मानव जीवन के मूल्य में कमी, सैन्य मौतों की बढ़ती संख्या, अनिवार्य सैन्य सेवा से फरार के बढ़ते मामलों और ज़ायोनी शासन के मूल्यों में बदलाव को इस युद्ध के अन्य परिणाम बताया और कहा कि इसराइल अब अमेरिकी समाज के एक हिस्से पर निर्भरता के अलावा वैश्विक अलगाव में घिर गया है।

 

चैनल 12 के सैन्य संवाददाता 'नीर द्वोरी' ने भी कहा कि सेना और रिजर्व बल अत्यधिक क्षीण हो चुके हैं, गोला-बारूद के भंडार और उत्पादन क्षमता सीमित है और अकेले सैन्य अभियान ग़ज़ा, लेबनान, सीरिया और ईरान में संकटों को हल करने में असमर्थ हैं।

 

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि राजनीतिक रणनीति और राजनयिक समझौतों के बिना कोई सैन्य उपलब्धि नहीं होगी, और इस स्थिति के जारी रहने से इसराइल की आंतरिक एकता और अंतरराष्ट्रीय वैधता दोनों पहले से कहीं अधिक कमज़ोर हो जाएंगी। mm