अलअक़्सा इंतेफ़ाज़ा को जारी रखने पर फ़िलिस्तीनियों का बल
फ़िलिस्तीनी फ़िलिस्तीन के उद्देश्य की प्राप्ति के एकमात्र मार्ग के रूप में इंतेफ़ाज़ा आंदोलन को जारी रखने पर बल दे रहे हैं।
फ़िलिस्तीनियों ने अलअक़्सा इंतेफ़ाज़ा की सोलहवीं वर्षगांठ पर इस आंदोलन को जारी रखने पर बल दिया है। अलअक़्सा इंतेज़ाफ़ा आंदोलन की सोलहवीं वर्षगांठ ऐसी स्थिति में आ पहुंची है कि फ़िलिस्तीनी जनता की इस प्रतिरोधक प्रक्रिया ने उनकी पीड़ा को पहले से ज़्यादा स्पष्ट किया है जो क़ुद्स के अतिग्रहणकारी शासन से ख़ाली हाथ लड़ रहे हैं।
28 सितंबर अलअक़सा आंदोलन की वर्षगांठ है। यह वह आंदोलन है जिसके भड़कने के पीछे ज़ायोनी प्रधान मंत्री एरियल शारोन ज़िम्मेदार था।
28 सितंबर सन 2000 को एरियल शारोन बड़ी संख्या में पुलिस बल के साथ एक भड़काउ क़दम के तहत पवित्र मस्जिदुल अक़्सा के परिसर में दाख़िल हुआ। उसके मस्जिदुल अक़्सा के अनादर के इस दुस्साहस भरे क़दम ने फ़िलिस्तीनी जनता का आक्रोश भड़काया और वे ज़ायोनी पुलिस के साथ भिड़ गए कि जिसके दौरान 13 फ़िलिस्तीनी शहीद हुए।
फ़िलिस्तीनियों ने सबसे पहला इंतेफ़ाज़ा 1987 में शुरु किया। उसके बाद दूसरा इंतेफ़ाज़ा सन 2000 में शुरु किया जिसका नाम अलअक़्सा इंतेफ़ाज़ा है। यही वह इंतेफ़ाज़ा आंदोलन है जिसके नतीजे में ज़ायोनी शासन अपने अतिग्रहित इलाक़ों में से एक इलाक़े यानी ग़ज़्ज़ा से वर्ष 2005 में पीछे हटने पर मजबूर हुआ।
फ़िलिस्तीन के हालात यह दर्शाते हैं कि फ़िलिस्तीनियों का प्रतिरोध रुकने के बजाए और व्यापक होता जा रहा है।
अलअक़्सा इंतेफ़ाज़ा, इंतेफ़ाज़ा के दूसरे चरण की पृष्ठिभूमि बना है। पिछले एक साल से जो ख़बरे आ रही हैं, वह फ़िलिस्तीनियों की इंतेफ़ाज़ा के दूसरे चरण की तय्यारी का पता दे रही हैं। इस संदर्भ में फ़िलिस्तीनी बारंबार यह बल दे रहे हैं कि फ़िलिस्तीनियों का तीसरा इंतेफ़ाज़ा निश्चित है और इस तीसरे आंदोलन के आरंभिक चरण के शुरु होने का संकेत भी मिल रहा है। हालिया महीनों में फ़िलिस्तीनी जनता के प्रतिरोध में आयी तेज़ी यह दर्शाती है कि ज़ायोनी शासन के ख़िलाफ़ इंतेफ़ाज़ा एक नए नाम क़ुद्स इंतेफ़ाज़ा के नाम से शुरु हो गया है।(MAQ/T)