सीरिया के बारे में तुर्की का दृष्टिकोण
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तुर्की के विपक्षी दलों का कहना है कि देश की सत्ता तानाशाही की ओर बढ़ रही है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Oct ०१, २०१६ १३:४६ Asia/Kolkata

तुर्की के विपक्षी दलों का कहना है कि देश की सत्ता तानाशाही की ओर बढ़ रही है।

तुर्की की ख़ल्क़ पार्टी के नेता कमाल क़लीचदार ओग़लू ने अंकारा सरकार की नीतियों की कड़ी आलोचना की है।  उन्होंने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि अंकारा सरकार ने सीरिया के बारे में अपनी ग़लत नीति में अभी तक कोई सुधार नहीं किया है।  तुर्की की सबसे बड़ी विपक्षी पर्टी के नेता ने कहा कि सरकार अब भी सीरिया के बारे में ग़लत नीति अपनाए हुए है जबकि वह यह घोषणा करती है कि सीरिया की संप्रभुता का वह सम्मान करती है।  इससे पहले तुर्की के राष्ट्रपति अर्दोग़ान, कई बार यह घोषणा कर चुके हैं कि वे तुर्की की संप्रभुता और अखंण्डता का सम्मान करते हैं।  रूस की अपनी यात्रा के दौरान भी अर्दोग़ान ने कहा था कि वे सीरिया के संदर्भ में मास्को की नीतियों का समर्थन करते हैं।  तुर्की के अधिकारियों की ओर से सीरिया की संप्रभुता और अखण्डता के सम्मान पर आधारित बयान एेसी स्थिति में दिये जा रहे हैं कि अंकारा ने सीरिया में सक्रियआतंकवादियों का समर्थन करके क्षेत्र में अस्थिरता उत्पन्न की है।  इस बात को देखते हुए यह अनुचित नहीं लगता कि तुर्की के सबसे बड़े विपक्षी दल के नेता ने अर्दोग़ान सरकार से सीरिया के संदर्भ में नीतियों में सुधार की बात कही है।

इसी बीच हाल ही में सऊदी युवराज मुहम्मद बिन नाएफ की तुर्की यात्रा के दौरान सऊदी अरब ने तुर्की के साथ विभिन्न क्षेत्रों विशेषकर सुरक्षा के क्षेत्र में कुछ समझौते किये हैं।  टीकाकारों के अनुसार इस बात के दृष्टिगत कि सऊदी अरब, बश्शार असद का खुला विरोधी है, रेयाज़ और अंकारा के बीच होने वाले सुरक्षा समझौतों का क्रियान्वयन, क्षेत्रीय राष्ट्रों और सरकारों विशेषकर सीरिया के लिए दुष्परिणाम ला सकते हैं।  जानकारों का कहना है कि रजब तैयब अर्दोग़ान की ओर से तुर्की के संविधान में परिवर्तन की मांग का मुख्य कारण सीरिया के बारे में अपने निजी विचारों को क़ानूनी रूप देना है।  यह वह बात है जो तुर्की के विपक्षी दलों के विरोध के कारण अभी तक व्यवहारिक रूप धारण नहीं कर सकी है।