यमनी प्रतिरोध के मीज़ाईल का सामना करने में सऊदी अरब बेबस
यमनी प्रतिरोध के मीज़ाईल का सामना करने में सऊदी अरब बेबस
जद्दा में अब्दुल अज़ीज़ हवाई अड्डे पर यमनी सेना और स्वंयसेवी बल की ओर से फ़ायर किए गए मीज़ाईल से सऊदी अरब बौखला गया है और यमनी प्रतिरोध के सामने अपनी बेबसी को छिपाने के लिए निराधार आरोप का सहारा ले रहा है।
गुरुवार की रात यमन के रक्षा मंत्रालय ने एक विज्ञप्ति में बताया कि पश्चिमी सऊदी अरब के जद्दा शहर के अब्दुल अज़ीज़ हवाई अड्डे पर बरकान-1 मीज़ाईल मारा गया जो अपने लक्ष्य पर लगा।
सऊदी सामाचारिक हल्क़ों ने जनमत के मन में चिंता पैदा करने के लिए यमनी प्रतिरोध पर पवित्र इस्लामी स्थलों को निशाना बनाने का आरोप मढ़ना शुरु कर दिया और यह दावा किया कि यमनी क्रान्तिकारियों ने सअदा शहर से पवित्र नगर मक्का पर एक ब्लिस्टिक मीज़ाईल मारा है।
सऊदी अरब का यह आरोप बहुत ही हास्यास्पद है। अस्ल में सऊदी अरब यमन में मिल रही निरंतर नाकामी की क्षतिपूर्ति के लिए पवित्र स्थलों को बहाना बनाने की कोशिश कर रहा है ताकि अपने राजनैतिक लक्ष्य साध सके।
यमन पर सऊदी गठजोड़ 600 से ज़्यादा दिनों से नाना प्रकार के अपराध करने और वर्जित हथियारों के इस्तेमाल के बावजूद, यमन में राजनैतिक व सैन्य क्षेत्र में कोई सफलता हासिल नहीं कर पाया।
यमन की धर्मपरायण जनता की छवि को ख़राब करने के लिए सऊदी अरब का झूठा आरोप लगाने का बचकाना खेल ऐसी हालत में है कि इस साल यमनी आले सऊद शासन के सांप्रदायिक व्यवहार की बलि चढ़ते हुए ईश्वर के घर काबे के दर्शन से वंचित हो गए। आले सऊद शासन की फूट डालने की नीति इस्लामी जगत के दुश्मनों में ख़ास तौर पर इस्राईल और अमरीका की सेवा के लिए है।
यमन पर पिछले 19 महीने से हमलों में सऊदी गठजोड़ की बेबसी स्पष्ट हो चुकी है और सऊदी अरब का यमनी फ़ोर्सेज़ की ओर से जद्दा के अब्दुल अज़ीज़ एयरपोर्ट पर मीज़ाईल से हमले को पवित्र स्थल पर हमले की संज्ञा देना यह दर्शाता है कि आले सऊद शासन यमन में अपने बनाए हुए दलदल में फंस गया है। (MAQ/T)