अब केवल 15 प्रतिशत ज़मीन ही फिलिस्तीनियों के पास बची है
भौगोलिक क्षेत्र इस्राईल के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि एक देश बनने के लिए जायोनी शासन को भूमि की आवश्यकता है और यह चीज़ हर देश की मूलभूत ज़रूरत होती है।
फिलिस्तीन के एक केन्द्र ने 30 मार्च को “ज़मीन दिवस” के अवसर पर एक विज्ञप्ति जारी करके घोषणा की है कि जायोनी शासन ने फिलिस्तीन की 85 प्रतिशत अर्थात 27 हज़ार वर्ग किलोमीटर भूमियों पर कब्ज़ा कर लिया है।
30 मार्च वर्ष 2017 “ज़मीन दिवस” की 41वीं वर्षगांठ है। इस दिन के नामकरण का मूल कारण जायोनी शासन द्वारा 30 मार्च 1967 को फिलिस्तीन की भूमियों के एक भाग पर कब्ज़ा कर लेना था। इस्राईल ने फिलिस्तीन के जलीला क्षेत्र की भूमियों पर कब्ज़ा करके उसे दूसरे स्थानों से अवैध अधिकृत आये पलायन कर्ता यहूदियों को दे दी थी।
जायोनी शासन की इस कार्यवाही पर फिलिस्तीनियों ने तुरंत प्रतिक्रिया जताई इस प्रकार से कि फिलिस्तीनियों ने 30 मार्च 1967 को प्रदर्शन किया किन्तु जायोनी सैनिकों ने इन प्रदर्शनों में 6 फिलिस्तीनियों को शहीद और 100 से अधिक को घायल कर दिया जबकि सैकड़ों दूसरे फिलिस्तीनियों को गिरफ्तार कर लिया।
इसी कारण फिलिस्तीनियों ने 30 मार्च का नाम “ज़मीन दिवस” रखा है और प्रतिवर्ष इस दिन को पश्चिमी किनारे, ग़ज्ज़ा पट्टी, पूर्वी बैतुल मुकद्दस और बेघर होने वाले फिलिस्तीनी जायोनी शासन के विरुद्ध प्रदर्शन करते हैं।
भौगोलिक क्षेत्र इस्राईल के लिए बहुत महत्व रखता है क्योंकि एक देश बनने के लिए जायोनी शासन को भूमि की आवश्यकता है और यह चीज़ हर देश की मूलभूत ज़रूरत होती है। इस आधार पर जायोनी शासन अधिक से अधिक फिलिस्तीनियों की ज़मीनों पर कब्ज़ा करने के प्रयास में है ताकि इस भारी कमी व ज़रूरत को पूरा कर सके।
इस्राईल के अपराधों पर एक दृष्टि इस बात की सूचक है कि जायोनी शासन मुख्य रूप से अपने भौगोलिक क्षेत्रों में विस्तार के उद्देश्य से अपराधों को अंजाम दे रहा है।
जायोनी शासन के इन्हीं अपराधों के कारण विश्व में बेघर होने वालों की सबसे अधिक संख्या फिलिस्तीनियों की है। क्योंकि फिलिस्तीन में आंकड़ा केन्द्र की घोषणा के अनुसार फिलिस्तीन की केवल 15 प्रतिशत भूमि ही फिलिस्तीनियों के पास रह गयी है और 85 प्रतिशत यानी 27 हज़ार वर्ग किलोमीटर पर जायोनी शासन ने कब्ज़ा लिया है। MM