तुर्की ने सीरिया के कई क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया
तुर्की ने सीरिया में आतंकवाद से मुकाबले के बहाने उसके कई क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लिया है
सीरिया की ज़मीन के प्रति तुर्की की लालसा दिन प्रतिदिन बढ़ती और ख़तरनाक रूप धारण करती जा रही है। इस प्रकार से कि इस विषय पर सीरिया ने दोनों देशों की सीमा रेखा परिवर्तित करने के संबंध में तुर्की की शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियों पर प्रतिक्रिया जताई है।
दमिश्क ने बल देकर कहा है कि अंकारा ने अफ्रीन नदी के सूखा होने का दुरुपयोग किया है और दोनों देशों की सीमाओं पर जो कटीले तार थे उसने उन्हें उठा लिया है ताकि सीरियाई ज़मीन की 15 किलोमीटर वर्ग की भूमि पर पूरी तरह कब्जा कर ले और यह कार्य सीरिया की संप्रभुता का खुला उल्लंघन है।
मॉस्को में सीरिया के राजदूत रियाज़ हद्दाद ने कहा कि तुर्की के सैनिकों ने इसी प्रकार एदलिब के आस- पास के कुछ गांवों पर अतिग्रहण कर लिया है और लाज़ेकिया के आस -पास के कुछ दूसरे गांवों पर कब्ज़ा कर लिया है।
रूस में सीरिया के राजदूत ने बल देकर कहा कि तुर्की ने अफ्रीन के उत्तर में दग़माश की ऊंचाईयों पर भी कब्ज़ा कर लिया है और वहां पर वह दीवार बना रहा है ताकि सीरिया से उसे अलग दिखा सके।
रियाज़ हद्दाद ने कहा कि अंकारा ने सीरिया से अपने सैनिकों को नहीं निकाला है और ये सैनिक इस समय अलबाब नगर के उत्तर में मौजूद हैं और वे आतंकवादी गुटों से सहकारिता करके उस क्षेत्र में एक शहर बनाने के प्रयास में हैं और यह सीरिया से तुर्क सैनिकों के बाहर निकलने पर आधारित अंकारा अधिकारियों के बयान के खिलाफ है।
यह ऐसी स्थिति में है जब तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब अर्दोग़ान ने भी एक बार फिर बल देकर कहा है कि उनके सैनिक अलबाब, अर्राइ और जराब्लस के बाद हलब के मिन्बिज क्षेत्र की ओर जायेंगे। तुर्की के राष्ट्रपति ने सोमवार को भी कहा था कि अलबाब शहर में आतंकवादियों के दमन के लिए फुरात शील्ड कार्यवाही का पहला चरण समाप्त हो गया है परंतु दूसरी कार्यवाही आरंभ होने वाली है।
बहरहाल सीरिया में तुर्की की कार्यवाहियां इस बात की सूचक हैं कि वह सीरिया की ज़मीन को लोभ की दृष्टि से देख रहा है और सीरिया की भूमि में वह जो कार्यवाहियां कर रहा है वह सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2254 के विरुद्ध हैं।
ज्ञात रहे कि सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव नंबर 2254 को सीरिया संकट के समाधान के संबंध में पारित किया गया है और इसमें सीरिया की स्वाधीनता, स्वतंत्रता और संप्रभुता की रक्षा पर बल दिया गया है। MM