सऊदी अरब में मुंगेरी लाल के सपने
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यदि यह कहा जाए कि सऊदी अरब के डिप्टी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने वरिष्ठ पत्रकार दाऊद शरयान को जो इंटरव्यू दिया और जो मंगलवार को कई टीवी चैनलों से एक साथ प्रसारित हुआ, वह सऊदी अरब के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार है, उन जवाबों, जानकारियों और प्रतिक्रियाओं की वजह से नहीं जो इस साक्षात्कार में हैं बल्कि स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के स्तर पर अपने निहितार्थों के कारण।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May ०४, २०१७ ११:४९ Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब में मुंगेरी लाल के सपने

यदि यह कहा जाए कि सऊदी अरब के डिप्टी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने वरिष्ठ पत्रकार दाऊद शरयान को जो इंटरव्यू दिया और जो मंगलवार को कई टीवी चैनलों से एक साथ प्रसारित हुआ, वह सऊदी अरब के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण साक्षात्कार है, उन जवाबों, जानकारियों और प्रतिक्रियाओं की वजह से नहीं जो इस साक्षात्कार में हैं बल्कि स्थानीय, क्षेत्रीय और अंतर्राष्ट्रीय राजनीति के स्तर पर अपने निहितार्थों के कारण।

प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान इस साक्षात्कार में डिप्टी क्राउन प्रिंस या क्राउन प्रिंस की हैसियत से नहीं बल्कि राजगद्दी पर बैठने जा रहे नरेश के रूप में बात करते दिखाई दिए।

यदि इस साक्षात्कार की विषयवस्तु को देखें तो हम पाएंगे कि विशेष रूप से जो आर्थिक विषय को उठाया गया है और बंद हो चुके एलाउंस और अन्य सुविधाओं को बहाल करने की जो बातें की गई हैं वह सऊदी नागरिकों को संतुष्ट करने की कोशिश है और आम नागरिकों का ग़ुस्सा कम करने का प्रयास है जो सुविधाओं की कटौतियों और अप्रत्यक्ष रूप से लगाए गए टैक्सों के कारण किसी पहाड़ का रूप धारण कर गया था। वैसे प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने तो कहा कि जनता के ग़ुस्से के डर से सुविधाओं की बहाली नहीं हुई है लेकिन उनके इस इंकार को ज़मीनी सच्चाई नहीं माना जा सकता।

मुहम्मद बिन सलमान बहुत आत्मविश्वास के साथ बात कर रहे थे और पाठ बहुत अच्छी तरह याद करके आए थे। उन्होंने अंकड़ों का भाषा प्रयोग की और आने वाले समय की सुविधाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने सोना, पीतल और लोहे की खदनों से मिलने वाले एक 1300 अरब डालर मिलने का दावा किया। उन्होंने कहा कि अरामको कंपनी के पांच प्रतिशत शेयर बेच कर उससे मिलने वाली रक़म को इन्हीं विभागों को विकसित करने पर खर्चा किया जाएगा।

प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने कहा कि सऊदी अरब की थल सेना यमन के हौसी आंदोलन तथा उनके घटक अली अब्दुल्लाह सालेह के सैन्य बलों को कुछ दिनों के भीतर उखाड़ फेंकने की क्षमता रखती हैं लेकिन इस बात का डर है कि एसी कार्यवाही करने की स्थिति में हज़ारों सऊदी सैनिक मारे जाएंगे और इसी तरह यमन में आम नागरिकों की जानें जाएंगी। यह बात सही भी है। इस लिए कि नुक़सान बहुत ज़्यादा होगा और सऊदी अरब के घरों में शोक छा जाएगा। लेकिन क्या यह सही नहीं है कि सऊदी अरब के युद्धक विमान दो साल से अधिक समय से यमन पर बमबारी कर रहे हैं और हज़ारों लोगों की जानें ले चुके हैं जबकि यमनी नागरिकों को हथियार डाल देने पर वह आज भी मजबूर नहीं कर सके।

प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान की यह बात हम नहीं मान सकते कि युद्ध लंबा खिंचेगा तो इसमें सऊदी अरब का फ़ायदा होगा। क्योंकि यमन घेराबंदी में है और वहां कोई सहायता नहीं पहुंच रही है। वैसे इस बयान से सऊदी अरब के वह सारे दावे और आरोप ग़लत साबित हो गए जिनमें कहा जा रहा था कि ईरान हौसी अथवा अंसारुल्लाह आंदोलन की हथियारों और मिसाइल से मदद कर रहा है।  अगर लड़ाई इसी तरह जारी रहती है तो सऊदी अरब को भारी जानी और माली दोनों तरह का नुक़सान होगा। इस  लिए उचित होगा कि सऊदी अरब अपने मन से यह ग़लत धारण निकाल दे ताकि ख़ुद को नुक़सान से बचाए, और उस पर युद्ध अपराध और मानवता के विरुद्ध अपराध के जो आरोप लग रहे हैं उनसे मुक्ति दिलाए। यह एसे अपराध हैं जो किसी समय पर सऊदी अरब को सैकड़ों अरब डालर का हर्जाना अदा करने पर मजबूर कर सकते हैं।

प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने ईरान से बातचीत के सारे दरवाज़े बंद कर दिए और कहा कि हम एसी शासन व्यवस्था से कैसे समझौता कर सकते हैं जो चरमपंथी विचारधारा है आधारित है और जिसमें पूरे इस्लामी जगत और उसके पवित्र स्थलों पर नियंत्रण करने और शीया मत फैलाने और बारहवें इमाम हज़रत महदी अलमुन्तज़र की वापसी के लिए भूमि समतल करने की बात कही गई है। प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने अपने साक्षात्कार के आख़िर में एक ख़तरनाक बात कही। उन्होंने कहा कि हम इस बात की प्रतीक्षा में नहीं बैठेंगे कि लड़ाई सऊदी अरब की सीमा के भीतर पहुंचे बल्कि हम लड़ाई ईरान के भीतर ले जाएंगे, ईरानी, मुसलमानों के क़िब्ले पर क़ब्ज़ा करना चाहते हैं।

लड़ाई ईरान के भीतर ले जाने का मतलब जातीय व सांप्रदायिक अल्पसंख्यकों विशेष रूप से सुन्नी समुदाय को भड़काना और उन्हें हथियार और पैसा सप्लाई करना है जैसा कि यमन, इराक़ और सीरिया में किया गया है या इससे पहले अफ़ग़ानिस्तान में हुआ है। जो व्यक्ति यह धमकी दे रहा है वह सऊदी अरब का रक्षा मंत्री और नरेश का बेटा है और इस समय सऊदी अरब में सारे बड़े फ़ैसले उसी के हाथ में हैं। तो क्या सऊदी अरब इस समय ईरान के विरुद्ध नया मोर्चा खोलना चाहता है?! क्या सऊदी अरब इस नई लड़ाई के आर्थिक और राजनैतिक बोझ को उठा पाएगा जबकि वह यमन और सीरिया की लड़ाइयों में भी फंसा हुआ है? एसी स्थिति में ईरान की जवाबी कार्यवाही क्या होगी?!!

प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान का यह साक्षात्कार बहुत महत्वपूर्ण और ख़तरनाक है। इसके हर वाक्य की समीक्षा और विशलेषण करने की ज़रूरत है लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे सऊदी अरब की सत्ता में बड़े बदलाव के लक्षण दिखाई दे रहे हैं जिसकी शुरूआत 42 शाही आदेशों से हो चुकी है जिनमें प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान के क़रीबी राजकुमारों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया गया है।

सऊदी अरब की सत्ता में एसे बदलाव होने वाले हैं जो पहले कभी भी नहीं हुए और यह देश बहुत जल्द क्राउन प्रिंय या नए नरेश के युग में दाख़िल होने वाला है जिसका नाम है मुहम्मद बिन सलमान या फिर यह कि बड़ा चमत्कार हो जाए जो सारे आंतरिक समीकरणों को उलट पलट कर रख दे। हमें बस प्रतीक्षा करनी चाहिए!

लेखक अब्दुल बारी अतवान, अरब जगत के वरिष्ठ पत्रकार हैं

अनुवाद और संपादन, पार्स टुडे हिंदी