संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पहुंचे
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ताकाल में मध्यपूर्व की तथाकथित शांतिवार्ता के बंद होने के दृष्टिगत उसे आरंभ कराने के संबंध में कुछ प्रयास शुरु हो गये हैं
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Aug २८, २०१७ १४:५७ Asia/Kolkata

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ताकाल में मध्यपूर्व की तथाकथित शांतिवार्ता के बंद होने के दृष्टिगत उसे आरंभ कराने के संबंध में कुछ प्रयास शुरु हो गये हैं

संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव एन्टोनियो गुटेरस तीन दिन की यात्रा पर अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन पहुंचे हैं। सूचना के अनुसार उनकी इस यात्रा का लक्ष्य फिलिस्तीनियों और जायोनी शासन के मध्य बंद पड़ी तथाकथित शांतिवार्ता प्रक्रिया को दोबारा आरंभ कराने के लिए प्रयास करना है।

उनके कार्यक्रम में फिलिस्तीनी प्रशासन के प्रमुख महमूद अब्बास और जायोनी शासन के प्रधानमंत्री बिनयामिन नेतेनयाहू से मुलाकात भी शामिल है।

वर्ष 2011 से अरब जगत में जो जनांदोलन आरंभ हुए हैं उसके कारण अरब देशों की ओर से फिलिस्तीन समस्या उपेक्षा का कारण बनी है और जायोनी शासन ने फिलिस्तीन समस्या से आम जनमत का ध्यान हटाने के लिए इस विषय का दुरूपयोग किया है और उसने फिलिस्तीन की अतिग्रहित भूमियों में जायोनी कालोनियों के निर्माण की योजना को बहुत गति प्रदान कर दी है और उसका यह कार्य फिलिस्तीन में नया इन्तेफाज़ा कुद्स आंदोलन आरंभ होने का कारण बना।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के सत्ताकाल में मध्यपूर्व की तथाकथित शांतिवार्ता के बंद होने के दृष्टिगत उसे आरंभ कराने के संबंध में कुछ प्रयास शुरु हो गये हैं ताकि वह फिलिस्तीनियों और जायोनी शासन के मध्य तथाकथित वार्ता प्रक्रिया से जुड़े विषय की निगरानी कर सके। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेर्ड कुशनर के चयन को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है। जेर्ड कुशनर चूंकि एक यहूदी हैं इसलिए वह इस्राईल की ओर रुझान रखते हैं।

वास्तव में अमेरिका जायोनी शासन का मूल समर्थक है और एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के गठन की कम से कम आकांक्षा की भी उसने अनदेखी कर दी है।

यह उस स्थिति में है जब संयुक्त राष्ट्रसंघ दो स्वतंत्र एक फिलिस्तीन और दूसरे यहूदी देश की योजना को व्यवहारिक बनाये जाने का इच्छुक है। संयुक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव एन्टोनियो गुटेरस की अवैध अधिकृत फिलिस्तीन यात्रा को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।

बहरहाल जायोनी शासन के दृष्टिकोणों की समीक्षा इस बात की सूचक है कि बिनयामिन नेतेनयाहू की दक्षिणपंथी सरकार फिलिस्तीन समस्या के शांतिपूर्ण समाधान के लिए वार्ता प्रक्रिया में विश्वास नहीं रखती है और यहां तक कि उसने एक स्वतंत्र फिलिस्तीनी देश के गठन की योजना की भी अनदेखी कर दी है।

इस आधार पर फिलिस्तीन के संबंध में इस्राईल के दृष्टिकोणों को दृष्टि में रखते हुए कहा जा सकता है कि एन्टोनियो गुटेरस की यात्रा की कोई विशेष उपलब्धि नहीं होगी विशेषकर इसलिए कि जायोनी शासन फिलिस्तीनियों के किसी भी अधिकार को मान्यता नहीं देता यहां तक कि वह समस्त फिलिस्तीनियों को उनकी मातृभूमि से निकालने का इच्छुक है और साथ ही वह सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों पर भी कोई ध्यान नहीं देता है। MM