सऊदी अरब में सत्ता की लड़ाई और उसके कारण
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सऊदी अरब और उसके घटकों के जल्दबाज़ी भरे क़दमों से पता चलता है कि रियाज़ और उसके घटक, क्षेत्र में लेबनान को अपनी युद्धोन्मादी नीतियों का अभ्यासपट बनाने के प्रयास में हैं।
(last modified 2023-11-29T09:15:15+00:00 )
Nov १०, २०१७ १५:५९ Asia/Kolkata

सऊदी अरब और उसके घटकों के जल्दबाज़ी भरे क़दमों से पता चलता है कि रियाज़ और उसके घटक, क्षेत्र में लेबनान को अपनी युद्धोन्मादी नीतियों का अभ्यासपट बनाने के प्रयास में हैं।

सऊदी अरब के बाद बहरैन, कुवैत और संयुक्त अरब इमारात ने भी एक बयान जारी करके अपने नागरिकों को तुरंत लेबनान छोड़ने का आदेश दिया और कहा कि कोई भी नागरिक लेबनान की यात्रा न करे।

सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी करके अपने नागरिकों से कहा है कि वे जितनी जल्दी हो सके लेबनान छोड़ कर चले जाएं।  सऊदी अरब के विदेश मंत्रालय के बयान में यह कहा गया है कि हमार जो भी नागरिक लेबनान में हैं वे तत्काल लेबनान छोड़ दें और किसी भी देश से लेबनान की यात्रा पर न जाएंं।

प्रमाणों से पता चलता है कि सऊदी अरब ने हालिया सात वर्षों के दौरान मध्यपूर्व विशेषकर ईरान के प्रभाव वले क्षेत्रों में नया युद्ध आरंभ करने के लिए लेबनान को बलि का बकरा बना रखा है। 

यहां पर यदि इतिहास पर नज़र डालें तो आपको समझ में आ जाएगा कि सऊदी अरब, ईरान और उसके घटकों से मध्यपूर्व में बुरी तरह मुंह की खा चुका है। रियाज़ के अधिकारी मध्यपूर्व में अपना प्रभाव बढ़ाने के बजाए ईरान के प्रभाव को रोकने जैसी ग़लत नीतियों पर काम कर रहे हैं। यही कारण है कि उन्होंने सीरिया पर आतंकवाद को थोप दिया ताकि इसके द्वारा वह सीरिया की सत्ता को परिवर्तित कर दें और इस देश को प्रतिरोध के मोर्चे से निकाल दें। इराक़ में भी बग़दाद की केन्द्र सरकार को कमज़ोर करने के उसने दाइश और अन्य आतंकवादी गुटों का भरपूर समर्थन किया, यही नहीं उसने यमन में भी अंसारुल्लाह के विरुद्ध व्यापक हमले आरंभ कर दिए। 

दूसरे शब्दों में यह कहा जा सकता है सऊदी अरब सीरिया, इराक़, यमन और लेबनान में ईरान के हाथों बुरी तरह मुंह की खा चुका है और उसे अपनी ग़लतियों को दोहराने के बजाए इतिहास से पाठ सीखना चाहिए। (AK)