रियाज़ में तथाकथित आतंकवाद विरोधी गठजोड़ का सम्मेलन
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सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में इस्लामी देशों के आतंकवाद विरोधी सैनिक एलायंस की बैठक हुई जिसमें सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों ने भाग लिया। सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने कहा कि इस समय 40 से अधिक देशों ने आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की है।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Nov २७, २०१७ १८:१७ Asia/Kolkata

सऊदी अरब की राजधानी रियाज़ में इस्लामी देशों के आतंकवाद विरोधी सैनिक एलायंस की बैठक हुई जिसमें सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों ने भाग लिया। सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान ने कहा कि इस समय 40 से अधिक देशों ने आतंकवाद से लड़ने के लिए अपनी तत्परता की घोषणा की है।

निश्चित रूप से आतंकवाद एक अंतर्राष्ट्रीय ख़तरा है जिससे लड़ने के लिए वैश्विक संकल्प की ज़रूरत है। मगर इन हालात में यह किसी भी तरह से उचित नहीं है कि सऊदी अरब आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई की अगुवाई करे। हालिया वर्षों के दौरान मध्यपूर्व में सऊदी अरब ने जो कार्यवाहियां की हैं उनसे साबित होता है कि आतंकवाद से लड़ाई का सऊदी सरकार का दावा एक राजनैतिक मज़ाक़ है।

सीरिया में सात साल तक फैले रहने वाले आतंकवाद का सबसे बड़ा समर्थक और जनक सऊदी अरब है। रियाज़ सरकार यमन में अपदस्थ राष्ट्रपति मंसूर हादी की मदद के लिए आतंकी संगठनों का सहारा ले रही है। इराक़ के अधिकारियों ने भी अनेक अवसरों पर यह कहा है कि सऊदी अरब इराक़ में आतंकवाद का समर्थन करता रहा है। आतंकवाद और आतंकी संगठनों की जड़ें सऊदी अरब में अंकुरित होने और फलने फूलने वाली वहाबी तकफ़ीरी विचारधारा से जुड़ी हुई हैं।

वाशिंग्टन टाइम्ज़ के स्तंभकार काल थामस ने लिखा कि आतंकियों से लड़ाई में सऊदी अरब पर भरोसा करना एसा ही है जैसे जातिवाद से लड़ने के लिए कू क्लक्स क्लैन से गठबंधन किया जाए। सऊदी अरब ने दशकों से एक शैतान को अस्तित्व दिया और उसे पाला पोसा और अब उससे लड़ने की बात कर रहा है। आतंकियों का प्रमुख स्रोत ठिकाना आतंकियों से लड़ाई का केन्द्र कैसे बन सकता है।

दूसरी बात यह है कि सऊदी अरब ने 14 दिसम्बर 2015 को आतंकवाद के विरुद्ध नए इस्लामी गठबंधन की बात की थी जिसका नेतृत्व सऊदी अरब के हाथ में हो। लगभग दो साल की इस अवधि में जब मध्यपूर्व में दाइश तथा अन्य आतंकी संगठनों के विरुद्ध लड़ाई जारी रही तो इस गठबंधन ने कहीं भी आतंकियों पर एक गोली तक नहीं चलाई। सीरिया और इराक़ में फैले दाइशी आतंकवाद से लड़ाई ईरान, सीरिया, इराक़ और हिज्बुल्लाह ने लड़ी है।

अतः सऊदी अरब के नेतृत्व में बनने वाला यह गठबंधन मात्र दिखावा है इसी लिए आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में धुव्रीय भूमिका निभाने वाला देश ईरान इसमें शामिल नहीं है। यही से यह भी साबित हो जाता है कि सऊदी अरब आतंकवाद को उस मोर्चे पर हमले के लिए बहाने के रूप में प्रयोग कर रहा है जो आतंकवाद से लड़ रहा है।