इस्राईल फ़िलिस्तीनियों प्रदर्शनकारियों पर ज़हरीली गैस का प्रयोग कर रहा है
अमरीकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प द्वारा बैतुल मुक़द्दस को इस्राईल की राजधानी घोषित किए जाने के कारण, फ़िलिस्तीन विश्व समुदाय के ध्यान का केन्द्र बना हुआ है। पिछले दो हफ़्तों के दौरान, ट्रम्प के इस क़दम का जो व्यापक विरोध हुआ है, उससे एक बात स्पष्ट हो गई है कि दुनिया में अमरीका की शक्ति कमज़ोर पड़ती जा रही है। यहां तक कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमरीका के कुछ निकटतम घटकों ने भी अमरीका के इस क़दम का समर्थन नहीं किया है।
विश्व भर में ट्रम्प के इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ शांतिपूर्ण प्रदर्शनों के कारण, ज़ायोनी शासन ने अवैध अधिकृत इलाक़ो में फ़िलिस्तीनियों पर अपने अत्याचारों में वृद्धि कर दी है। फ़िलिस्तीनियों का कहना है कि बैतुल मुक़द्दस के विषय पर किसी तरह का कोई समझौता नहीं हो सकता।
ज़ायोनी शासन फ़िलिस्तीनियों के ख़िलाफ़ आधुनिक हथियारों के अलावा, फ़ास्फ़ोरस गैस का भी प्रयोग कर रहा है। फ़िलिस्तीनी प्राधिकरण ने ज़ायोनी शासन से मांग की है कि फ्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ इस्तेमाल की जाने वाली नई आंसू गैस के नाम की घोषणा करे। फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों पर इस नई आंसू गैस के भयानक साइड इफ़ैक्ट्स हुए हैं। दक्षिणी ग़ज्ज़ा के रफ़ह में मेडिकल सूत्रों ने कहा है कि इस गैस का प्रभाव इससे पहले इस्तेमाल की जाने वाली गैसों से अलग है, इस गैस से दिल की धड़कनों में तेज़ी आ जाती है, उल्टियां होती हैं, खांसी होती है और चक्कर आने लगते हैं।
इस संदर्भ में प्रेस टीवी का कहना है कि अमरीकी राष्ट्रपति के फ़ैसले का विरोध करने वाले फ़िलिस्तीनी प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ इस्राईली सेना जिस आंसू गैस का प्रयोग कर रही है, वह ज़हरीली है।
इस्राईल के इन समस्त अत्याचारों के बावजूद, ज़ायोनी शासन का पतन निश्चित है, इसलिए कि उसका विरोध केवल फ़िलिस्तीनी ही नहीं बल्कि दुनिया के समस्त स्वतंत्र लोग उसके मुक़ाबले में हैं।