मलाला की प्रशंसा और अहद की उपेक्षा क्यों?
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16 वर्षीय फ़िलिस्तीनी लड़की अहद तमीमी के घर पर रात के समय इस्राईली सैनिकों ने छापा मारा और उन्हें उठाकर ले गए।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Dec २८, २०१७ १५:१० Asia/Kolkata
  • मलाला की प्रशंसा और अहद की उपेक्षा क्यों?

16 वर्षीय फ़िलिस्तीनी लड़की अहद तमीमी के घर पर रात के समय इस्राईली सैनिकों ने छापा मारा और उन्हें उठाकर ले गए।

इस्राईली अधिकारियों ने तमीमी पर आरोप लगाया है उन्होंने एक इस्राईली सैनिक और एक अधिकारी पर हमला किया था।

इससे एक दिन पहले ही तमीमी उन इस्राईली सैनिकों से उलझ पड़ी थीं, जो उनके घर में घुस गए थे। इस घटना से कुछ ही देर पहले एक इस्राईली सैनिक उनके 14 वर्षीय चचेरे भाई के सिर में गोली मार दी थी और उनके घर पर सीधे गैस के गोले फ़ायर करके खिड़की के शीशे तोड़ दिए थे।

तमीरी की गिरफ़्तारी के बाद उनके एक भाई और मां को भी गिरफ़्तार कर लिया गया और यह लोग अभी भी इस्राईल की जेल में क़ैद हैं।

अहद तमीमी और उनके परिवार पर इस्राईली सैनिकों ने यह समस्त अत्याचार किए लेकिन पश्चिमी मानवाधिकार संगठन और महिलाओं एवं लड़कियों के अधिकारों की वकालत का दम भरने वाले ख़ामोश तमाशाई बने हुए हैं।

विश्व में लड़कियों को सशक्त बनाने के उनके अभियान के तहत लगाए जाने वाले नारे अनगिनत हैं, जैसे कि गर्ल अप, गर्ल राइज़िंग, गर्ल्स 20 सम्मेलन, क्योंकि मैं एक लड़की हूं, लड़कियां सीखें, लड़की घोषणापत्र वग़ैरा वग़ैरा।

जब 15 वर्षीय पाकिस्तानी लड़की मलाला यूसुफ़ज़ई के सिर में तालिबान ने गोली मारी थी, पश्चिमी और दुनिया भर की प्रतिक्रिया बिल्कुल अलग थी। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधान मंत्री गोर्डन ब्राउन ने एक संदेश जारी करते हुए कहा था, मैं मलाला हूं। यूनेस्को ने स्टैंड अप फ़ोर मलाला के नाम से एक अभियान शुरू किया था।

मलाला को अमरीका के तत्कालीन राष्ट्रपति बराक ओबामा और संयुक्त राष्ट्र के महासचिव से मुलाक़ात के लिए आमंत्रित किया गया। मलाला ने संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। उन्होंने दर्जनों प्रतिष्ठित पुरस्कारों के अलावा 2013 में नोबल पुरस्कार के लिए नामित किया गया और 2014 में नोबल पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

संक्षेप में पूरी दुनिया मलाला के समर्थन में एकजुट होकर खड़ी हो गई थी।

लेकिन हमें कहीं #मैं अहद हूं (#IamAhed) या #स्टैंड अप फ़ोर अहद (#StandUpForAhed) अभियान या मीडिया में ऐसी सुर्ख़ियां दिखाई नहीं दे रही हैं।

महिला अधिकारों की वकालत करने वाले, मानवाधिकार संगठन और राजनीतिज्ञ कहीं अहद पर हो रहे अत्याचारों का समर्थन करते नहीं दिखाई दे रहे हैं। बल्कि हद तो यह हो गई कि जब पिछले दिनों अमरीका में एक सभा को संबोधित करने के लिए वाशिंग्टन ने उन्हें वीज़ा देने से इनकार कर दिया।

मलाला की ही तरह अहद तमीमी भी जीवन भर अन्याय और अत्याचारों के ख़िलाफ़ डटी रही हैं। उन्होंने बहुत सी क़ुर्बानियां दी हैं और इस्राईली सैनिकों ने उनके एक चाचा और एक चचेरे भाई को शहीद कर दिया है। उनके मां-बाप और भाई को कई बार गिरफ़्तार किया जा चुका है।

दो साल पहले जब अहद तमीमी केवल 14 वर्ष की थीं, उनका एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें उन्हें अपने छोटे भाई को इस्राईली सैनिकों के पंजे से छुड़ाते हुए देखा जा सकता है।  

यहां यह सवाल उठता है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अहद के लिए भी वही ग़ुस्सा और समर्थन क्यों दिखाई नहीं दे रहा है, जो मलाला के लिए दिखाई दिया। अहद के लिए प्रतिक्रिया में इतना अंतर क्यों है?

 

(aljazeera.com से आभार के साथ)