इस्राईल शहीद फ़िलिस्तीनियों के शवों को उनके परिजनों को नहीं देगा
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इस्राईल की संसद नेसेट ने 24 जनवरी को एक कानून पारित किया। इस कानून के अनुसार जायोनी शासन फ़िलिस्तीनी शहीदों के शवों को उनके परिजनों के हवाले नहीं करेगा।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jan २५, २०१८ १७:३८ Asia/Kolkata

इस्राईल की संसद नेसेट ने 24 जनवरी को एक कानून पारित किया। इस कानून के अनुसार जायोनी शासन फ़िलिस्तीनी शहीदों के शवों को उनके परिजनों के हवाले नहीं करेगा।

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 6 दिसंबर 2017 को घोषणा की थी कि वह बैतुल मुक़द्दस को जायोनी शासन की राजधानी के रूप में मान्यता देते हैं। इसी प्रकार ट्रम्प ने तेलअवीव से अमेरिकी राजदूत को बैतुल मुकद्दस स्थानांतरित करने की घोषणा की थी।

ट्रम्प की इस ग़ैर कानूनी घोषणा के बाद जायोनी शासन ने अपने विस्तारवादी लक्ष्यों को प्राप्त करने के प्रयास को और गति प्रदान कर दी। जायोनी शासन जारी वर्ष के आरंभ से अब तक फिलिस्तीनियों के खिलाफ तीन प्रस्ताव पारित कर चुका है।

इस्राईली संसद नेसेट ने 24 जनवरी से पहले भी दो कानून पारित किया था। एक कानून बैतुल मुकद्दस के एकजुट होने के बारे में था जबकि दूसरा शहादत प्रेमी फिलिस्तीनियों को मृत्यु दंड देने से संबंधित था और अब नेसेट ने कानून पारित किया है कि शहीद होने वाले फिलिस्तीनियों के शवों को उनके परिजनों के हवाले नहीं करेगा।

यद्यपि इस्राईल इससे पहले भी फिलिस्तीनी शहीदों के शवों को उनके परिजनों को देने से परहेज़ करता था परंतु इस संबंध में कानून पारित करके उसने अपने ग़ैर कानूनी कार्य को कानूनी रूप दे दिया है।

जायोनी शासन का मानना है कि फिलिस्तीनी शहीदों की शव यात्रा इस्राईल विरोधी प्रदर्शनों की भूमिका होती है और फिलिस्तीनी शहीदों के शवों को उनके परिजनों को न देकर वह इस प्रकार के प्रदर्शनों के आयोजन को रोक सकता है। साथ ही जायोनी शासन का मानना है कि इस तरह वह फिलिस्तीनियों के इन्तेफ़ाज़ा आंदोलन का दमन भी कर सकता है। MM