ईरान के बारे में इस्राईल, रूस से आख़िर क्या चाहता है?
इस्राईल के प्रधान मंत्री बिनयामिन नेतयाहू ने अपनी हालिया मास्को यात्रा के दौरान एक बार फिर सीरिया और लेबनान में ईरान के प्रभाव को कम करने के लिए एड़ी चोटी का ज़ोर लगा दिया।
रूस के राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ इगोर पानकरातिनकोव ने कहा है कि अमरीकी उप राष्ट्रपति माइक पेंस की इस्राईल यात्रा के तुरंत बाद, नेतनयाहू ने मास्को की यात्रा की है।
उन्होंने कहा कि अमरीका और इस्राईल सीरिया और लेबनान में ईरान के बढ़ते प्रभाव से गहरी चिंता मे हैं।
लेबनान और सीरिया में संकट उत्पन्न करके हिज़्बुल्लाह और प्रतिरोधी शक्तियों को कमज़ोर या नष्ट करने की साज़िश रचने वाले अमरीका और इस्राईल हर मोर्चे पर पराजित हो चुके हैं तो अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि नेतनयाहू की रूस की पिछली कुछ यात्राओं पर नज़र डालें तो पता चलेगा कि जब भी मास्को मध्यपूर्व में कोई महत्वपूर्ण क़दम उठाना चाहता है तो इस्राईली प्रधान मंत्री रूस की यात्रा पर पहुंच जाते हैं।
पिछले कुछ वर्षों में मास्को और वाशिंगटन के बीच तनाव में वृद्धि के संदर्भ में रूसी विशेषज्ञ का कहना था कि रूस ने जब अपने घटक देशों के साथ मिलकर सीरिया संकट के समाधान के लिए क़दम उठाया तो यह बात इस्राईल और अमरीका को बहुत खली।
पानकरातिनकोव ने कहा कि इस्राईल, सीरिया में हिज़्बुल्लाह के सैन्य ठिकानों को नुक़सान पहुंचाना चाहता है और इस काम के लिए उसे रूस को निष्पक्ष रहने के लिए राज़ी करना होगा।
क्षेत्र में इस्राईली और अमरीकी अधिकारियों की भागदौड़ एवं बौखलाहट से यही नतीजा निकाला जा सकता है कि मध्यपूर्व में ज़ायोनियों की समस्त साज़िशें एक एक करके विफल हो रही हैं और दूसरी ओर ईरान और उसके सहयोगी देश एवं प्रतिरोधी संगठन शक्तिशाली होते जा रहे हैं। msm