ईरानी ड्रोन अमेरिकी रक्षात्मक परतों में कैसे प्रवेश करते हैं?
पार्स टुडे – अल-जज़ीरा न्यूज़ नेटवर्क ने क्षेत्र में अमेरिकी वायु रक्षा की कई परतों में ईरानी ड्रोनों के प्रवेश के तरीके की जांच करते हुए लिखा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और घायल होने से युद्ध के घटनाक्रम की दिशा बदल सकती है।
पार्स टुडे के अनुसार अल-जज़ीरा नेटवर्क ने लिखा:
"जॉर्डन में एक अमेरिकी सैन्य अड्डे पर ईरानी मिसाइल हमले की घोषणा, वाशिंगटन द्वारा इस हमले की पुष्टि और कई अमेरिकी सैनिकों के मारे जाने और घायल होने की घोषणा ने ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों को रोकने के लिए अमेरिकी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों की क्षमता के बारे में गंभीर संदेह पैदा कर दिया है।"
क्षेत्रीय सैन्य और रणनीतिक विशेषज्ञ 'ब्रिगेडियर एलियास हन्ना' ने इस घटनाक्रम की प्रकृति को स्पष्ट करते हुए कहा कि
"ईरानी प्रोजेक्टाइल का अपने लक्ष्यों तक पहुँचना इस सत्य को दर्शाता है कि कोई भी रक्षा नेटवर्क चाहे कितना भी उन्नत क्यों न हो 100 प्रतिशत सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता।"
हन्ना ने कहा कि "इससे पहले भी, ईरानी मिसाइलों ने कब्जे वाले क्षेत्रों को निशाना बनाया था; जबकि यह शासन 'आयरन डोम' और 'एरो' प्रणालियों जैसी उन्नत वायु रक्षा प्रणालियों का उपयोग करता है।" उनका मानना है कि "क्षेत्र में अमेरिकी अड्डों पर 'थैड' (THAAD) और 'पैट्रियट' जैसी प्रणालियों की उपस्थिति जरूरी नहीं कि कुछ प्रक्षेप्यों के प्रवेश और उनके लक्ष्य तक पहुँचने को रोके।"
हन्ना ने अपने विश्लेषण में माना कि "वर्तमान घटनाएँ, वाशिंगटन और तेहरान के बीच दबावों के आदान-प्रदान के एक नए चरण का संकेत हैं।" उन्होंने समझाया कि "अमेरिका ने अपनी रणनीति समुद्री नाकाबंदी को बढ़ाने और ईरान के लिए आर्थिक लागत बढ़ाने पर आधारित की है और इसके विपरीत ईरान की प्रतिक्रिया दो समानांतर रास्तों पर आधारित है: 1. हरमुज़ जलडमरूमध्य में नेविगेशन को बाधित करना जिसके वैश्विक अर्थव्यवस्था और क्षेत्रीय देशों पर परिणाम होंगे। 2. हमले के लक्ष्यों के भूगोल का विस्तार करना जिसका कारण जॉर्डन की भूमि तक हमलों का पहुँचना है।" mm