इस्राईल, हज़ारों अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं को निकालने के प्रयास में
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फ़िलिस्तीन की धरती पर साठ वर्षों से क़ब्ज़ा जमाए बैठे ज़ायोनी शासन ने इस धरती से अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं को निकालने की नीति अपना ली है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Feb ०३, २०१८ २१:२३ Asia/Kolkata
  • इस्राईल, हज़ारों अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं को निकालने के प्रयास में

फ़िलिस्तीन की धरती पर साठ वर्षों से क़ब्ज़ा जमाए बैठे ज़ायोनी शासन ने इस धरती से अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं को निकालने की नीति अपना ली है।

फ़ार्स न्यूज़ एजेन्सी की रिपोर्ट के अनुसार ज़ायोनी शासन ने जनवरी 2018 को एरीटेरिया और सूडान के लगभग 38 हज़ार शरणार्थियों को ख़तरनाक प्रस्ताव दिया और दो विकल्प दिया कि या तो वह 3500 डालर और हवाई जहाज़ का टिकट लेकर किसी दूसरे अफ़्रीक़ी देश चले जाएं या जेल में सड़ने के लिए तैयार रहें।

अमरीकी समाचार पत्र न्यूयार्क टाइम्ज़ ने अपने संस्करण में लिखा है कि इस्राईल ने पलायनकर्ताओं के बारे में जो नीति अपना रखी है उससे अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में काफ़ी रोष पाया जाता है।

अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं के निकालने जाने की इस्राईल की नई नीति के आलोचकों का कहना है कि होलोकास्ट की घटना के बाद इन पलायनकर्ताओं ने ही इस्राईल का गठन किया और ज़ायोनी शासन की ज़िम्मेदारी है कि वह पलायनकर्ताओं से शालीन व्यवहार करे। आलोचकों ने ज़ायोनी प्रधानमंत्री बिनयामीन नितिनयाहू से कहा है कि वह अफ़्रीक़ी पलायनकर्ताओं के निष्कासन की नीति पर पुनर्विचार करें।

हज़ारों अफ़्रीक़ी जिनमें अधिकतर संख्या एरीटेरिया की थी वर्ष 2013 में तेल अवीव द्वारा मिस्र के साथ सीमा पर बाड़ लगाए जाने से पहले ही अवैध अधिकृत फ़िलिस्तीन में प्रविष्ट हो गये थे। (AK)