यमन में एक और हिज़्बुल्लाह नहीं बनने देंगेः सऊदी अरब
सऊदी अरब के सुरक्षा सलाहकार और यमन के ख़िलाफ़ सऊदी सैन्य गठजोड़ के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनके देश ने यमन पर इस लिए चढ़ाई की ताकि इस देश में हिज़्बुल्लाह जैसे अन्य गुट को शक्तिशाली न बनने दे।
अहमद असीरी ने यूरो न्यूज़ से बात करते हुए कहा कि यमन पर सऊदी अरब के सैन्य हमले का उद्देश्य इस देश में लेबनान के हिज़्बुल्लाह संगठन जैसे गुट के गठन को रोकना था। उन्होंने यमन मूल ढांचे की तबाही और बेरोज़गारी व दरिद्रता फैलने जैसे युद्ध के कुपरिणामों की तरफ़ संकेत किए बिना दावा किया कि सऊदी अरब का एकमात्र उद्देश्य यमन में स्थिरता लाना है। असीरी ने कहा कि वाशिंग्टन में अपने मित्रों से हमारी जो सहमति हुई है वह यह है कि आतंकी गुटों, चरमपंथियों और अपनी विचारधारा अन्य देशों तक पहुंचाने वाले देशों के मुक़ाबले में क्षेत्र की स्थिरता के लिए हम अपना सहयोग जारी रखेंगे।
यूरो न्यूज़ के पत्रकार ने सऊदी अरब के सुरक्षा सलाहकार और यमन के ख़िलाफ़ सऊदी सैन्य गठजोड़ के प्रवक्ता से यह पूछा कि यमन के युद्ध में अब तक लगभग दस हज़ार लोग मारे गए हैं और तीस लाख से अधिक बेघर हो गए हैं तो जब सऊदी युवराज यह कहते हैं कि ईरान सऊदी अरब का प्रतिद्वंद्वी नहीं है तो फिर यह युद्ध अब भी क्यों जारी है? इसके जवाब में असीरी ने कहा कि मैं एक बार फिर कहना चाहूंगा कि हम उन देशों के खिलाफ़ लड़ रहे हैं जो अर्ध सैनिकों के माध्यम से सक्रिय हैं। जब कुछ लोग अर्ध सैनिकों और के माध्यम से काम करेंगे तो उसका परिणाम यही होगा और विश्व समुदाय को इस आवश्यकता का आभास करना चाहिए। उन्होंने कहा कि सऊदी अरब इस बात की अनुमति नहीं देगा कि यमन का कंट्रोल अर्ध सैनिकों के हाथ में आ जाए और इसी तरह वह इस बात को भी सहन नहीं करेगा कि एक और हिज़्बुल्लाह यमन की सत्ता में आ जाए। (HN)