सऊदी अरब क़तर के खिलाफ सैनिक कार्यवाही करेगाः लोमोन्ड
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सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के नाम एक पत्र में चेतावनी दी है कि अगर कतर ने S-400 मिसाइल प्रणाली प्राप्त कर ली तो वह उसके विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करेगा।
(last modified 2023-04-09T06:25:50+00:00 )
Jun ०२, २०१८ ०९:३० Asia/Kolkata
  • सऊदी अरब क़तर के खिलाफ सैनिक कार्यवाही करेगाः लोमोन्ड

सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के नाम एक पत्र में चेतावनी दी है कि अगर कतर ने S-400 मिसाइल प्रणाली प्राप्त कर ली तो वह उसके विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करेगा।

फ्रांसीसी समाचार पत्र लोमोन्ड ने शुक्रवार को लिखा कि सऊदी नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रां के नाम एक पत्र में चेतावनी दी है कि अगर कतर ने S-400 मिसाइल प्रणाली प्राप्त कर ली तो वह उसके विरुद्ध सैनिक कार्यवाही करेगा।

मॉस्को में क़तर के राजदूत ने जारी वर्ष के जनवरी महीने में कहा था कि दोहा रूस से S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली ख़रीदना चाहता है।

फहद बिन अब्दुल अतिया ने आगे कहा था कि इस मिसाइल रक्षा प्रमाणी की ख़रीदारी के संबंध में होने वाली वार्ता काफी आगे बढ़ चुकी है।

समाचार पत्र लोमोन्ड के अनुसार मलिक सलमान ने कहा था कि  कतर द्वारा S-400 मिसाइल प्रणाली से लैस हो जाने पर सऊदी अरब के सुरक्षा हित ख़तरे में पड़ जायेंगे और मलिक सलमान ने फ्रांस का आह्वान किया है कि वह दोहा को इस मिसाइल रक्षा प्रणाली को न ख़रीदने के लिए अपने दबावों को अधिक कर दे।

सऊदी अरब और उसके घटक मिस्र, संयुक्त अरब इमारात और बहरैन ने पांच जून वर्ष 2017 को कतर से कूटनियक संबंध तोड़ लिये और प्रतिबंध लगाने के अलावा कतर की हवाई, ज़मीनी और समुद्री सीमाओं का परिवेष्टन कर लिया।

इन चार देशों ने पिछले वर्ष 23 जून को कतर के सामने 13 मांगें रखी थीं और कहा था कि कतर के साथ संबंधों को सामान्य होने के लिए इन शर्तों को व्यवहारिक किया जाना जरूरी है।

सऊदी अरब और उसके घटकों ने जो शर्तें लगाईं थीं उनमें सबसे महत्वपूर्ण शर्त ईरान और हिज़्बुल्लाह के साथ कूटनयिक संबंध विच्छेद कर लेना, अलजज़ीरा टीवी चैनल को पूर्णरूप से बंद कर देना और कतर से तुर्की की सैनिक छावनी को समाप्त कर देना था परंतु दोहा ने इन शर्तों को स्वीकार नहीं किया।

कतर के अधिकारियों ने बारमबार बल देकर कहा है कि इस प्रकार की मांग कतर के आतंरिक मामलों में हस्तक्षेप है और इन मांगों को स्वीकार नहीं किया जा सकता। MM