क़तर सऊदी अरब के साथ बिना पूर्व शर्त बातचीत का इच्छुक
क़तर ने सऊदी अरब के साथ बिना पूर्व शर्त बातचीत की इच्छा ज़ाहिर की है।
क़तर के शासक शैख़ तमीम बिन हमद आले सानी ने रविवार को कुवैत के शासक शैख़ सबाह अहमद जाबिर अस्सबाह के नाम ख़त में सऊदी अरब, यूएई, बहरैन और मिस्र के साथ तनाव ख़त्म करने में दोहा के रूझान की सूचना देते हुए बल दिया कि दोहा पारदर्शी और बिना पूर्व शर्त वाली बाचतीत के लिए तय्यार है।
इरना के अनुसार, क़तर के शासक ने इस ख़त में साफ़ कर दिया है कि दोहा सिर्फ़ उस बैठक में भाग लेगा जिसकी कार्यसूचि स्पष्ट हो और किसी तरह की पूर्व शर्त न लगायी गयी हो।
क़तर के शासक ने यह ख़त कुवैत के शासक के कुछ हफ़्ता पहले फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के लिखे गए उस ख़त के बाद लिखा है जिसमें कुवैत के शासक ने क़तर, सऊदी अरब, यूएई और बहरैन के शासकों से अपने मतभेद को फ़ार्स खाड़ी सहयोग परिषद के भीतर हल करने की अपील की थी।
सऊदी अरब और उसके घटक देश मिस्र, यूएई और बहरैन ने 5 जून 2017 को दोहा से रियाज़ की अगुवाई वाले अरब धड़े के साथ न होने की वजह से कूटनैतिक संबंध तोड़ लिए और क़तर के ख़िलाफ़ पाबंदी लगाने के साथ साथ उस पर अपनी ज़मीनी, समुद्री और वायु सीमाएं बंद कर दीं।
इन चारों देशों ने 23 जून को 13 मांगों पर आधारित एक सूचि क़तर को पेश की और कहा कि दोहा के साथ संबंध के सामान्य होने की शर्त इन मांगों का पूरा होना है।
इन शर्तों में क़तर से ईरान और हिज़्बुल्लाह के साथ संबंध तोड़ने, अलजज़ीरा टीवी चैनल को बंद करने और क़तर की भूमि पर तुर्की की सैन्य छावनी को हटाने की शर्त शामिल थी, जिसे दोहा ने क़ुबूल नहीं किया।
क़तर के अधिकारी बारंबार बल दे चुके हैं कि सऊदी अरब और उसके घटक क़तर से ऐसी बातों का अनुरोध कर सकते हैं जिन्हें व्यवहारिक बनाया जा सके लेकिन क़तर सरपरस्ती थोपने की किसी भी कोशिश और अपने मामलों में किसी तरह के हस्तक्षेप को क़ुबूल नहीं करेगा। (MAQ/N)