इराक़ के सशस्त्र बल में हश्दुश्शाबी के विलय का लक्ष्य
इराक़ सरकार ने 10 अनुच्छेद पर आधारित एक आदेश में स्वयंसेवी बल हश्दुश्शाबी के इराक़ी सशस्त्र बल में विलय का एलान किया।
इराक़ पर तकफ़ीरी आतंकवादी गुट दाइश के हमले और इस देश के कुछ भूभाग पर उसके अतिग्रहण की वजह से इराक़ में वरिष्ठ धर्मगुरु आयतुल्लाह सीस्तानी ने स्वयंसेवी बल हश्दुश्शाबी के गठन का फ़तवा दिया था।
पहली पर इराक़ की हैदर अलएबादी की सरकार ने मार्च 2018 में हश्दुश्शाबी के सशस्त्र बल में विलय का आदेश दिया था। अब दूसरी बार इराक़ी प्रधान मंत्री आदिल अब्दुल महदी ने 10 अनुच्छेद पर आधारित आदेश में हश्दुश्शाबी के सशस्त्र बल में विलय पर बल दिया है। आदिल अब्दुल महदी और पूर्व इराक़ी प्रधान मंत्री हैदर अलएबादी के आदेश में कुछ अहम फ़र्क़ है जिनका उल्लेख ज़रूरी लगता है।
पहला फ़र्क़ दोनों के आदेश के समय में अंतर का है। हैदर अलएबादी ने इराक़ में संसदीय चुनाव के आयोजन के अवसर पर हश्दुश्शाबी के विलय का आदेश जारी किया था जिसके पीछे यह सोचा जा सकता है कि चुनावी नियत रही हो लेकिन आदिल अब्दुल महदी ने राष्ट्रीय हित और हश्दुश्शाबी के उपयोगिता के मद्देनज़र अपनी सरकार के कार्यकाल के पहले ही साल यह हुक्म जारी किया है।
दूसरा अंतर आदेश की विषय वस्तु का है। आदिल अब्दुल महदी के आदेश में आया है कि हश्दुश्शाबी अपने ढांचागत स्वरूप के साथ विलय हो रही है न कि भंग होकर और साथ ही इसका अपना प्रमुख भी होगा जिसे सशस्त्र बल का प्रमुख चुनेगा।
हैदर अलएबादी और आदिल अब्दुल महदी के आदेश में समानता भी है और वह यह कि दोनों ने दाइश के ख़िलाफ़ लड़ाई और देश में सुरक्षा क़ामय करने में हश्दुश्शाबी के सार्थक रोल को स्वीकार किया और दोनों ही ने इस स्वयंसेवी बल को इराक़ी सशस्त्र बल का अभिन्न अंग माना है।
अंत में यह कि इराक़ी जनता अब तक हश्दुश्शाबी के ख़िलाफ़ देशी व विदेशी स्तर पर विरोधियों के प्रचार से न सिर्फ़ यह कि प्रभावित नहीं हुयी और बल्कि उसने 2018 के संसदीय चुनाव में अलफ़त्ह धड़े को मत देकर कि जिसका हश्दुश्शाबी समर्थन करता है, इस संगठन के प्रति अपना विश्वास प्रकट कर दिया है।(MAQ/T)