ईरान में आतंकी कार्यवाहियों के लिए अलक़ाएदा से बहरैन का सहयोग
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अलजज़ीरा टीवी ने बताया है कि बहरैन के गुप्तचर विभाग ने अपने विरोधियों की हत्या कराने और इसी तरह ईरान के अंदर आतंकी कार्यवाहियों के लिए आतंकी गुटों अलक़ाएदा और अंसारुल फ़ुरक़ान से सहयोग किया है।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Jul १५, २०१९ १३:०० Asia/Kolkata
  • ईरान में आतंकी कार्यवाहियों के लिए अलक़ाएदा से बहरैन का सहयोग

अलजज़ीरा टीवी ने बताया है कि बहरैन के गुप्तचर विभाग ने अपने विरोधियों की हत्या कराने और इसी तरह ईरान के अंदर आतंकी कार्यवाहियों के लिए आतंकी गुटों अलक़ाएदा और अंसारुल फ़ुरक़ान से सहयोग किया है।

अलजज़ीरा टीवी की रिपोर्ट के अनुसार बहरैन के गुप्तचर विभाग ने वर्ष 2003 में आतंकी गुट अलक़ाएदा से सहयोग किया था जिसका उद्देश्य इस देश में सरकार विरोधी नेताओं की हत्या करवाना और इसी तरह ईरान में आतंकी कार्यवाहियां कराना था। अलजज़ीरा ने अपने एक कार्यक्रम में वर्ष 2003 से 2011 तक अलक़ाएदा और बहरैन के बीच सहयोग का पर्दा फ़ाश किया है।

 

इस रिपोर्ट के अनुसार बहरैन की ख़ुफ़िया एजेंसी ने अलक़ाएदा के एक सरग़ना को बहरैन के सरकार विरोधी नेताओं की हत्या का ठेका दिया था। बहरैन के तीन ख़ुफ़िया अधिकारियों ने इस देश के तानाशाह शैख़ हमद बिन ईसा के सीधे आदेश से इस योजना पर काम किया था। बहरैन के सरकार विरोधी नेताओं की जो लिस्ट तैयार की गई थी उसमें अब्दुल वहाब हुसैन का नाम मुख्य रूप से उल्लेखनीय है। रिपोर्ट में बताया गया है कि बहरैन के तानाशाह ने इस मामले में सीधे हस्तक्षेप किया और सऊदी अरब से मांग की कि वह आतंकियों की इस टीम के सरग़ना मुहम्मद सालेह को रिहा करे जो रियाज़ की एक जेल में बंद था।

 

अलजज़ीरा के इस कार्यक्रम में अलक़ाएदा के सरग़ना मुहम्मद सालेह ने बताया कि मैं इस कार्यक्रम में इस बात की गवाही देता हूं कि हमसे यह काम करने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि बहरैन के सुरक्षा अधिकारियों ने मुझसे संपर्क किया और कहा कि नरेश (शैख़ हमद बिन ईसा) ने आपसे कहा है कि आप शियों से मुक़ाबला करें और बहरैन के कुछ प्रमुख शिया नेताओं की हत्या कर दें। उन नेताओं में अब्दुल वहाब हुसैन प्रमुख थे। अलक़ाएदा के इस सरग़ना ने अपनी गवाही में कहा कि सऊदी अरब में इस गुट के लोगों को हरी झंडी दिखाई गई कि वे हथियार आयात करें। उन्होंने कहा सऊदी अरब में जेल से रिहा होने के बाद वे बहरैन आए जहां इस देश के शासक ने स्वयं उनका स्वागत किया और उनसे वादा किया कि सऊदी अरब में उन पर जो अत्याचार हुए हैं वे उनकी क्षतिपूर्ति करेंगे। (HN)