सीरियाई राष्ट्रपति की तुर्की और अमरीका को चेतावनी
https://parstoday.ir/hi/news/west_asia-i80892-सीरियाई_राष्ट्रपति_की_तुर्की_और_अमरीका_को_चेतावनी
सीरियाई राष्ट्रपति बशार असद ने तुर्की और अमरीका को चेतावनी देते हुए कहा है कि दाइश को लाभ पहुंचाने और फिर से उसे शक्तिशाली बनने में मदद करने वाली नीतियों से बचें।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Nov ०१, २०१९ १६:१९ Asia/Kolkata
  • सीरियाई राष्ट्रपति की तुर्की और अमरीका को चेतावनी

सीरियाई राष्ट्रपति बशार असद ने तुर्की और अमरीका को चेतावनी देते हुए कहा है कि दाइश को लाभ पहुंचाने और फिर से उसे शक्तिशाली बनने में मदद करने वाली नीतियों से बचें।

असद का कहना था कि अमरीका, दाइश में एक बार फिर जान फूंकने का प्रयास कर रहा है, लेकिन सीरियाई राष्ट्र हर साज़िश का डटकर मुक़ाबला करेगा।

ग़ौरतलब है कि अमरीका की सहमति से तुर्की ने उत्तरी सीरिया में 17 अक्तूबर से सैन्य ऑप्रेशन शुरू किया था और क़रीब एक हफ़्ते तक जारी रहने वाले इस ऑप्रेशन के बाद रूस के सहयोग से उसने उत्तरी सीरिया में बफ़र ज़ोन बनाने की घोषणा कर दी।

दमिश्क़ का कहना है कि सीरिया संकट की शुरूआत से ही तुर्की ने अपनी सीमा से लगे सीरियाई इलाक़ों पर नज़रें गाढ़ रखी हैं और वह कुर्द बहुल इस इलाक़े पर क़ब्ज़ा करना चाहता है।

सीरियाई राष्ट्रपति असद का कहना है कि निश्चित रूप से तुर्की ने आतंकवाद से मुक़ाबले के लिए उत्तरी सीरिया पर हमला नहीं किया है, बल्कि वह इस पर क़ब्ज़ा करने की साज़िश रच रहा है। उन्हें कहा कि तुर्की इस इलाक़े में अमरीका के प्रतिनिधि की भूमिका निभा रहा है। कुर्दों को अमरीका की धोखाधड़ी वाली नीतियों के प्रति सचेत रहना चाहिए था, जो उसे अपना एक विश्वसनीय सहयोगी समझने की ग़लती करते चले आ रहे हैं।

सीरियाई राष्ट्रपति ने बहुत ही स्पष्ट शब्दों में तुर्की को चेतावनी देते हुए कहाः अगर तुर्की सीरिया से नहीं निकलता है तो हमारे पास युद्ध के अलावा और कोई विकल्प नहीं होगा। इसी तरह से इदलिब प्रांत में सक्रिय तुर्क समर्थक मीलिशियाओं से असद ने कहा कि हिंसा का रास्ता छोड़कर उन्हें तुर्की चले जाना चाहिए, और अगर उन्होंने हथियार नहीं रखे तो सीरियाई सेना अन्य आतंकवादी गुटों की तरह उनका सफ़ाया कर देगी।

सीरिया में दाइश सरग़ना अल-बग़दादी को मारने के लिए अमरीका द्वारा किए गए ऑप्रेशन को बशार असद ने एक ड्रामा बताते हुए कहा कि आतंकवाद के ख़िलाफ़ लड़ाई में अमरीका विश्व समुदाय का भरोसा खो चुका था, इसलिए उसने यह नाटक रचकर अपनी साख बचाने की कोशिश की है। हालांकि इसी के साथ अमरीका दाइश को फिर से ज़िंदा करने का भी प्रयास कर रहा है, क्योंकि वशिंगटन अपने हितों को इलाक़े में संकटों और अराजकता में ही देखता है।