अमरीकी प्रतिबंध किस हद तक तुर्की को नुक़सान पहुंचा सकते हैं?
रूस से आधुनिक मिस्राइल प्रणाली एस-400 ख़रीदने के कारण, अमरीका ने सोमवार को तुर्की पर प्रतिबंध लगा दिए, जिसमें सैन्य उपकरणों की सेल और परचेज़ करने वाली एजेंसी प्रेसिडेंसी फ़ॉर डिफ़ेंस इंडस्ट्रीज़ (SSB) को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है।
हालांकि मार्केट ने प्रतिबंधों के पैकेज को सलामी दी है, क्योंकि जैसी उम्मीद की जा रही थी, प्रतिबंध उतने कड़े नहीं हैं। तुर्की के सैन्य विश्लेषकों को इस बात से चिंता थी कि प्रतिबंधों का रक्षा क्षेत्र पर गंभीर प्रभाव हो सकता है, जिसने पिछले साल 10 अरब डॉलर से अधिक की क़ीमत के हथियार और सैन्य उपकरण बेचे थे।
प्रतिबंधों का सबसे महत्वपूर्ण भाग, SSB के निर्यात लाइसेंस को प्रतिबंधित करना है।

SSB के प्रमुख इस्माइल देमिर कि जिनका नाम प्रतिबंधों में शामिल है, कहना है कि उनकी एजेंसी पिछले कुछ समय से इस सिनारियो के लिए ख़ुद को तैयार कर रही थी।
उन्होंने कहा कि हमारे पास कोई भी अमरीकी लाइसेंस नहीं है, जिससे हमें मुश्किल स्थिति का सामना करना पड़े। इसलिए इसे सिर्फ़ औपचारिकता कह सकते हैं।
तुर्की ने पिछले साल एस-400 की बैटरीज़ ख़रीदने के लिए रूस को 2.5 अरब डॉलर का भुगतान किया था। वाशिंगटन ने काफ़ी पहले तुर्की को प्रतिबंधों की धमकी दी थी, लेकिन तुर्क राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान के अमरीकी राष्ट्रपति रजब तैयब अर्दोगान के साथ व्यक्तिगत रिश्तों के कारण, इन प्रतिबंधों को टाला जा रहा था।
अमरीकी प्रतिबंध, पहले से जारी किए गए लाइसेंसों पर लागू नहीं होंगे, जैसे कि एफ़-16 लड़ाकू विमानों के स्पेयर पार्ट्स की आपूर्ति पर, इसके बावजूद इससे SSB के 2 अरब डॉलर की क़ीमत के सालाना समझौते प्रभावित हो सकते हैं।
इसके अलावा, अमरीकी प्रतिबंध हुर्जेट प्रशिक्षण और हल्के लड़ाकू विमान और तुर्की के पांचवीं पीढ़ी के फ़ाइटर जेट TFX जैसी महत्वपूर्ण मल्टीबिलियन-डॉलर की परियोजनाओं के लिए समस्याएं पैदा कर सकते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमरीकी प्रतिबंधों को इतना अधिक हल्के में भी नहीं लिया जा सकता है। SSB तुर्की के रक्षा उपक्रमों और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में एक मुख्य कड़ी है। इस वास्तविकता के बावजूद कि तुर्की अपनी ज़रूरत के 70 प्रतिशत हथियार और सैन्य उपकरण ख़ुद तैयार कर रहा है, इस हक़ीक़त से इनकार नहीं किया जा सकता कि वह अपनी महत्वपूर्ण परियोजनाओं के लिए अभी भी विदेशी तकनीक और महारत पर निर्भर है।
SSB एजेंसी पर क्योंकि अब प्रतिबंधों का धब्बा लग गया है, इसलिए कोई भी थर्ड पार्टी उसके सहयोग में संकोच करेगी।
यहां एक महत्वूर्ण सवाल यह है कि क्या तुर्की, अमरीका के सैन्य उपकरणों पर अब रूस को प्राथमिकता देगा? लेकिन इससे दोनों देशों के बीच टकराव अधिक बढ़ेगा और वाशिंगटन, अंकारा के ख़िलाफ़ अधिक प्रतिबंध लागू करेगा, जो अर्दोगान कभी नहीं चाहेंगे। msm
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