तालिबान की जात के साथ क्या अफ़ग़ानिस्तान हार गया? (वीडियो रिपोर्ट)
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यहां तक कि लोग अपने घर का दस्तरख़ान भी बेच रहे हैं, शहर की सड़कें पिछले कुछ दिनों से घर की ज़रूरत की चीज़ें बेचने का केन्द्र बन गई हैं.
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
Sep १७, २०२१ १३:२४ Asia/Kolkata

यहां तक कि लोग अपने घर का दस्तरख़ान भी बेच रहे हैं, शहर की सड़कें पिछले कुछ दिनों से घर की ज़रूरत की चीज़ें बेचने का केन्द्र बन गई हैं.

लोग लगातार घर की चीज़ें बेचने के लिए यहां ला रहे हैं... लोगों का कहना है कि काम नहीं है, बरोज़गार हैं, इसलिए एक वक़्त का ख़ाना खाने के लिए घर की चीज़ें बेच रहे हैं।

कोई रोज़गार नहीं होने की वजह से और पूर्व सरकार के कर्मचारियों के बेरोज़गार होने जाने की वजह से अफ़ग़ानिस्तान के लोग बहुत कठिन समय से गुज़र रहे हैं... हम जब घर पहुंचे तो मकान मालिक रोने लगा और हमारे भी आंसू आ गए।

कुछ लोग एक वक़्त की रोटी के लिए घर की चीज़ें बेच रहे हैं और कुछ लोग देश छोड़ने की चिंता में... अफ़सोस की बात है कि तालिबान ने जो एलान किया था, सरकार के गठन में उन्होंने ऐसा नहीं किया, लोगों की चिंता बढ़ गई और यह जो आप देख रहे हैं यह सभी जो कुछ है उसे बेचकर अफ़ग़ानिस्तान से निकल जाना चाहते हैं, कुछ लोग बिल्कुल ख़ाली हाथ हैं इसलिए वह जो कुछ है उसे बेच रहे हैं।

यहां हर की चीज़ें देखी जा सकती हैं, कुछ कम इस्तेमाल हुई हैं और कुछ ज़्यादा इस्तेमाल हो चुकी हैं, पिछले दो दशकों में लगभग 50 देशों की अफ़ग़ानिस्तान में उपस्थिति के दौरान यह देश पूरी तरह से उपभोक्ता, आयातकर्ता और विदेशी मदद पर निर्भर बन गया है। अब जबकि अमरीका और उसके सहयोगी जा चुके हैं, अमरीका ने अफ़ग़ानिस्तान की संपत्ति को सीज़ कर दिया है। आजकल हर दिन बीतने के साथ अफ़ग़ानिस्तान के लोगों की हालत पहले से ज़्यादा ख़राब होती जा रही है। हाल ही में विश्व खाद्य कार्यक्रम ने एलान किया है कि अफ़ग़ानिस्तान में 90 फ़ीसद लोगों के पास तीन वक़्त का खाना नहीं है। बहनाम यज़दानी, आईआरआईबी, काबुल