तानाशाही सरकारों का समर्थक डेमोक्रेसी की बैठक कर रहा है!!
काफी समय से इस बात का प्रचार किया जा रहा है कि अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन डेमोक्रेसी के संबंध में एक वर्चअल बैठक करने वाले हैं और यह बैठक कल गुरूवार से बाइडेन के भाषण से आरंभ भी गयी है। इस दो दिवसीय बैठक में विश्व के 110 देशों के नेता और प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं।
रोचक बात यह है कि जिन देशों को इस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है उनमें चीन, रूस, हंगरी, सऊदी अरब, तुर्की और इसी प्रकार दसियों दूसरे देशों का नाम नहीं है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दावा किया कि इस बैठक में पांच बिन्दुओं पर ध्यान केन्द्रित किया जायेगा। संचार माध्यमों की आज़ादी पर बल दिया जायेगा। इसी प्रकार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बुराई व भ्रष्टाचार से मुकाबला किया जायेगा, डेमोक्रेसी में सुधार करने वालों का समर्थन किया जायेगा, डेमोक्रेसी को विस्तृत करने वाली तकनीक को बेहतर किया जायेगा और पारदर्शी व न्यायपूर्ण चुनाव का समर्थन किया जायेगा।
अमेरिका ने ऐसी स्थिति में डेमोक्रेसी के समर्थक और उसे विस्तृत करने वाले का वस्त्र धारण कर रखा है जब यह ज्ञात नहीं है कि दुनिया के किस संगठन व संस्था ने उसे यह ज़िम्मेदारी सौंप रखी है। साथ ही मानवाधिकारों के संबंध में अमेरिका के क्रियाकलाप जगज़ाहिर हैं। इन सबके बावजूद वह मानवाधिकारों की रक्षा का दावा भी करता है। इन चीज़ों के दृष्टिगत डेमोक्रेसी के संबंध में वह जो बैठक कर रहा है उस पर भी प्रश्न चिन्ह लग गये हैं।
इसी संबंध में एक अमेरिकी विचारक ने कहा है कि हम डेमोक्रेसी की बैठक की अगुवाई व नेतृत्व के लाएक़ नहीं हैं।
अमेरिकी विचारक, बुद्धिजीवी और हारवर्ड विश्वविद्यालय के प्रोफेसर स्टीफेन वॉल्ट ने डेमोक्रेसी के संबंध में होने वाली वर्चुअल बैठक में भाग लेने हेतु कई देशों के नेताओं से जो बाइडेन के निमंत्रण की ओर संकेत किया और लिखा कि खेद के साथ कहना पड़ता है कि हम डेमोक्रेसी के संबंध में इस प्रकार के प्रयास व नेतृत्व के लाएक़ नहीं हैं।
स्टीफेन वॉल्ट ने इस बैठक के आयोजन की आलोचना की और फॉरेन पॉलिसी में लिखा कि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इस बैठक के आयोजन का अस्ल लक्ष्य क्या है? उन्होंने लिखा कि इस बैठक में भाग लेने वालों का चयन बड़े हिसाब- किताब से किया गया है और उन्होंने हंगरी और कांगो गणराज्य की ओर विशेषरूप से इशारा किया और लिखा है कि फ्रीडम हाउस में हंगरी की स्थिति बेहतर होने के बावजूद उसे इस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित नहीं किया गया है जबकि कांगो को इस बैठक में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया गया है।
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने डेमोक्रेसी के संबंध में आज से होने वाली वर्चुअल बैठक में 110 देशों के नेताओं को भाग लेने का आह्वान किया है।
ज्ञात रहे कि इससे पहले रूस और चीन इस प्रकार की बैठक की आलोचना कर चुके हैं और अमेरिका में चीन और रूस के राजदूतों ने कई दिन पहले ही इस बैठक को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मतभेद व फूट पड़ने का कारण बताया है।
उल्लेखनीय है कि अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ऐसी स्थिति में डेमोक्रेसी के संबंध में होने वाली वर्चुअल बैठक में भाग लेने का आह्वन कर रहे हैं जबकि अरब देशों विशेषकर फार्स की खाड़ी की तानाशाही सरकारों से अमेरिका के घनिष्ठ संबंध हैं। दूसरे शब्दों में अमेरिका एक तरफ दुनिया के देशों को डेमोक्रेसी का दर्स देता है और दूसरी ओर तानाशाही सरकारों के साथ उसके घनिष्ठ संबंध हैं। सऊदी अरब और बैहरन जैसे अरब देशों के साथ उसके संबंधों को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है।
बहुत से जानकार हल्के अमेरिकी डेमोक्रेसी पर सवाल उठाते हैं और कहते हैं कि अमेरिका में मौजूद डेमोक्रेसी वास्तविक अर्थों में डेमोक्रेसी नहीं है और वे जारी वर्ष के 6 जनवरी को वाइट हाउस में होने वाली उस घटना की ओर संकेत करते हैं जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के समर्थकों ने चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं किया और अमेरिकी कांग्रेस पर हमला कर दिया था।
यही नहीं डोनाल्ड ट्रंप ने आज तक आधारिकारिक तौर राष्ट्रपति पद के चुनाव परिणामों को स्वीकार नहीं किया और बारमबार कहा है कि चुनाव में धांधली और घपला हुआ है। यही नहीं उन्होंने अमेरिकी डेमोक्रेसी को झूठी डेमोक्रेसी कहा है। MM
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