नेटो ने हमें बहुत ज़्यादा निराश कियाः ज़ेलेंस्की
यूक्रेन के राष्ट्रपति भी अब इस बात से आश्वस्त हो चुके हैं कि उनका देश नेटो का सदस्य नहीं बन पाएगा।
वेलोदेमीर ज़ेलेंस्की ने कहा है कि हमे अब यह बात स्वीकार करनी चाहिए कि यूक्रेन, नेटो का सदस्य नहीं बन सकता।
यूक्रेन के राष्ट्रपति ने एक बैठक में कहा कि हम वर्षों से यह सुनते आ रहे थे कि दरवाज़े खुले हुए हैं लेकिन अब यह सुन रहे हैं कि हम उसके अर्थात नेटो के सदस्य नहीं बन पाएंगे। उन्होंने कहा कि यह एक वास्तविकता है जिसको स्वीकार करना चाहिए।
बहुत विलंब के बाद ज़ेलेंस्की ने यह बात एसी स्थिति में स्वीकार की है कि जब यूक्रेन के विरुद्ध रूस की सैन्य कार्यवाही को अब पूरे 20 दिन गुज़र चुके हैं। इस दौरान यूक्रेन को हर हिसाब से भारी नुक़सान हो चुका है। यूक्रेन के विरुद्ध रूस की कार्यवाही का एक महत्वपूर्ण कारक यही मुद्दा अर्थात यूक्रेन द्वारा नेटो की सदस्यता प्राप्त करने का प्रयास था।
सन 2008 में बोखारेस्ट सम्मेलन में नेटो के राष्ट्राध्यक्षों ने पूर्व की ओर नेटो के विस्तार की योजना के अन्तर्गत यूक्रेन और जार्जिया को सदस्यता देने की घोषणा की थी। उस दिन के बाद से यही विषय रूस और यूक्रेन के बीच गंभीर मतभेद का कारण बनता गया।
पश्चिम की ओर झुकाव रखने वाले यूक्रेन के भूतपूर्व पूर्व राष्ट्रति विक्टर यूशचेन्को के सत्ताकाल में नेटो में इस देश की सदस्यता के मुद्दे को बारबार उठाया गया किंतु जब वहां पर रूस की ओर झुकाव रखने वाले राष्ट्रपति विक्टर यानोकोविच ने सत्ता संभाली तो इस मुद्दे को एक किनारे डाल दिया गया।
इसके बाद सन 2014 में उनके अपदस्त होने और यूक्रेन में फिर से पश्चिम की ओर झुकाव रखने वाली सरकार के आने के साथ ही नेटो में इस देश की सदस्यता के विषय को सर्वोपरि रखा गया। यूक्रेन के सत्ताधारियों के अनुसार इस का व्यवहारिक होना, पश्चिम के साथ यूक्रेन की घनिष्ठता की निशानी है और किसी भी बाहरी विशेषकर रूस के हमले की स्थिति में यूक्रेन की सुरक्षा सुनिश्चित हो जाएगी।
हालांकि उन लोगों ने यह नहीं सोचा की यही विषय रूस की रेडलाइन है जिसके बारे में वह बहुत ही संवेदनशील है। रूस ने हालिया महीनों के दौरान कई बार नाटो और अमरीका से कहा था कि यूक्रेन की नेटो में सदस्यता के मुद्दे की बात को समाप्त कर दिया जाए। पश्चिम ने हमेशा माॅस्को की इस मांग का विरोध किया।
वास्तव में अमरीका ने यूक्रेन को नेटो की सदस्यता के लिए सबसे अधिक उकसाया। अपनी विस्तारवादी नीतियों को बढ़ाने और रूस पर दबाव बनाने के उद्देश्य से अमरीका ने नेटो में यूक्रेन की सदस्यता के लिए बहुत ज़ोर लगाया।
हालांकि नेटो के दो सदस्य देश फ्रांस और जर्मनी का इस बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण नहीं है। नेटो के साथ ही यूरोपीय संघ के भी महत्वपूर्ण यह दो देश आरंभ से यह मानकर चल रहे थे कि यूक्रेन की नेटो में सदस्यता के बारे में रूस की ओर से बहुत कड़ी प्रतिक्रिया आ सकती है। यूक्रेन के विरुद्ध रूस की हालिया कार्यवाही ने फ्रांस और जर्मनी के उस डर को व्यवहारिक रूप में सिद्ध कर दिया।
इस समय एक ओर से तो ज़ेलेस्की ने यह बात मान ली है कि यूक्रेन, नेटो की सदस्यता हासिल नहीं कर सकता लेकिन दूसरी ओर उनके देश को रूस की सैन्य कार्यवाही से लगातार जानी और माली नुक़सान हो रहा है। एसे में उनको सुरक्षा की गारेंटी देने वाले पीछे हट चुके हैं।
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