क्रोएशिया ने रूस के 18 कूटनयिकों को निकाल दिया
क्रोएशिया के विदेशमंत्रालय ने एक विज्ञप्ति जारी करके रूस के 18 कूटनयिकों के निकाल देने की सूचना दी है।
क्रोएशिया के विदेशमंत्रालय की ओर से जारी होने वाली विज्ञप्ति में आया है कि इस देश में रूसी दूतावास में काम करने वाले 18 डिप्लोमेटों और 6 कर्मचारियों से कहा गया है कि जल्द से जल्द वे क्रोएशिया छोड़ दें। इसी प्रकार इस विज्ञप्ति में आया है कि यूक्रेन में रूसी सैनिकों की कार्यवाहियों पर आपत्ति जताने के लिए क्रोएशिया में रूसी राजदूत को तलब किया गया।
क्रोएशिया से पहले पोलैंड, जर्मनी, फ्रांस, इटली, स्पेन, जापान और डेनमार्क कई रूसी कूटनयिकों को अपने- अपने देशों से निकाल चुके हैं। 24 फरवरी से यूक्रेन के खिलाफ रूसी हमला जारी है और हमले के आरंभ से लेकर अब तक विभिन्न देशों से 382 रूसी कूटनयिकों को निकाला जा चुका है।
यूक्रेन पर रूस का विशेष सैन्य ऑप्रेशन आरंभ हुए 6 सप्ताह से अधिक का समय गुज़र रहा है और अब तक 25 देशों ने यूक्रेन के लिए सैन्य हथियार भेजे हैं। रूसियों का कहना है कि वे यूक्रेन पर कब्ज़ा करने का इरादा नहीं रखते हैं।
जानकार हल्कों का मानना है कि जो देश यूक्रेन की सैनिक सहायता कर रहे हैं और उसके लिए हथियार भेज रहे हैं वास्तव में वे आग में घी डालने का काम कर रहे हैं और इस तरह रूस-यूक्रेन युद्ध शीघ्र खत्म होने के बजाये लंबा खिंच रहा है और दोनों तरफ का भारी जानी व माली नुकसान हो रहा है।
इसी प्रकार जानकार हल्कों का मानना है कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे कुछ देश यूक्रेन की सैन्य सहायता करके रूस से अपनी दुश्मनी निकाल रहे हैं और साथ ही वे यह दर्शा रहे हैं कि यूक्रेन के हितैषी हैं और उसकी भलाई चाह रहे हैं जबकि ये देश रूस और यूक्रेन सहित किसी भी देश के न तो हितैषी थे और न हैं और वे केवल अपने हितों को साधने के लिए यूक्रेन की सहायता रहे रहे हैं और इस बात को यूक्रेन भी जानता है।
यूक्रेन के राष्ट्रपति विलोदिमीर ज़ेलेंस्की के उस बयान को इसी परिप्रेक्ष्य में देखा जा सकता है जिसमें उन्होंने कहा था कि पश्चिम ने हमें अकेला छोड़ दिया है।
नोटः यह व्यक्तिगत विचार हैं। पार्सटूडे का इनसे सहमत होना ज़रूरी नहीं है। MM
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