रोमानिया में अमरीका का एंटी मीज़ाईल तंत्र स्थापित
https://parstoday.ir/hi/news/world-i11236-रोमानिया_में_अमरीका_का_एंटी_मीज़ाईल_तंत्र_स्थापित
रोमानिया की राजधानी बुख़ारा से 180 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में डेवेस्लू अड्डे में, गुरुवार को अमरीका का एंटी मीज़ाईल तंत्र लग गया। इस अवसर पर नेटो प्रमुख, रोमानिया और अमरीका के अधिकारी भी मौजूद थे।
(last modified 2023-04-09T02:55:50+00:00 )
May १३, २०१६ १३:०५ Asia/Kolkata

रोमानिया की राजधानी बुख़ारा से 180 किलोमीटर दक्षिण-पश्चिम में डेवेस्लू अड्डे में, गुरुवार को अमरीका का एंटी मीज़ाईल तंत्र लग गया। इस अवसर पर नेटो प्रमुख, रोमानिया और अमरीका के अधिकारी भी मौजूद थे।

रोमानिया के राष्ट्रपति क्लॉस आइलहेज़ ने गुरुवार की शाम नेटो के महासचिव येन्स स्टोलटेन्बर्ग से मुलाक़ात में इस बात का उल्लेख करते हुए कि नेटो का एंटी मीज़ाईल तंत्र किसी देश के लिए ख़तरा नहीं है, बल दिया कि रोमानिया चाहता है कि नेटो की नौसेना कालासागर में हमेशा मौजूद रहे।

ऐसा लग रहा है कि पूर्वी यूरोप और कालासागर में नेटो की ज़्यादा से ज़्यादा उपस्थिति के लिए ज़रूरी पृष्ठिभूमि मुहैया करने में रोमानिया सक्रिय है। बताया जाता है कि बुख़ारा के अधिकारियों के इस व्यवहार से रूस नाराज़ है। वास्तव में रोमानिया ने नेटो की पूर्वी धड़े के देशों में उपस्थिति को मज़बूत करने के लिए 2 प्रभावी क़दम उठाए हैं। एक डेवेस्लू अड्डे में अमरीका के 12 मई को एंटी मीज़ाईल तंत्र की स्थापना है।

रूस की नज़र में इस तंत्र की स्थापना 1987 के मीडियम रेन्ज न्यूक्लियर फ़ोर्सेज़ ट्रीटी के ख़िलाफ़ है क्योंकि इस संधि में यूरोप में अमरीका और रूस की ओर से मध्ययम दूरी के परमाणु मीज़ाईल लगाना वर्जित है।

इसके साथ ही नेटो ने पूर्वी यूरोप में अपनी सैन्य उपस्थिति के आधार को मज़बूत करने के परिप्रेक्ष्य में, कालासागर में नौसैनिक उपस्थिति के लिए भी गंभीर प्रयास शुरु कर दिए हैं। इसी परिप्रेक्ष्य में रोमानिया की सरकार नेटो से कालासागर में उसके नौसैनिक बेड़े की तैनाति के लिए बात कर रही है। लेकिन नेटो की कालासागर में नौसैनिक उपस्थिति बुलग़ारिया, तुर्की और रोमानिया के अंतिम फ़ैसले पर निर्भर करेगी क्योंकि 1936 की मोन्ट्रो संधि के अनुसार, कालासागर के तटवर्ती क्षेत्र से बाहर के देशों की युद्धक नौकाएं 21 दिन से ज़्यादा कालासागर में लंगरअंदाज़ नहीं रह सकतीं।

साक्ष्य दर्शाते हैं कि रोमानिया कालासागर में नेटो की नौसैनिक उपस्थिति के लिए गंभीर रूप से प्रयास कर रहा है। रोमानिया में नेटो की नौसैनिक उपस्थिति का विषय पूर्वी यूरोप में ख़ास तौर पर युक्रेन संकट और दिन प्रतिदिन इस संकट के फैलने के बाद सामने आया।

युक्रेन संकट के बाद रोमानिया ने नेटो के सदस्यों देशों में ख़ास तौर पर अमरीका के साथ सहयोग बढ़ाने की कोशिश के तहत नेटो के साथ कई सैन्य अभ्यास किए। नेटो ने युक्रेन संकट के बाद पूर्वी यूरोप के देशों को अपने अपने सैन्य बजट को बढ़ाने और इन देशों में नेटो सेना की उपस्थिति के मौजूदा ढांचे को बदलने के प्रेरित किया।

नेटो के इस व्यवहार पर रूस ने नकारात्मक प्रतिक्रिया दिखायी है।

वास्तव में रूस और नेटो में एक दूसरे के प्रति अविश्वास और नेटो की ओर से भड़काउ कार्यवाहियों के जारी रहने से, नेटो और रूस में प्रतिस्पर्धा की वक्र रेखा ऊपर उठती जा रही है जिससे यूरोप की सुरक्षा का भविष्य स्पष्ट नहीं हो पा रहा है। (MAQ/T)