रूस और यूक्रेन की लड़ाई फिर तेज़ हो गई है
रूसी सेना लगातार आगे बढ़ रही है। रूसी सेनाएं यूक्रेन की सेना के ठिकानों की तरफ़ बढ़ती हैं और बीच के इलाक़े निर्जन दिखाई पड़ते हैं।
रूसी जनरल का कहना है कि शहरों की मज़बूत क़िलाबंदी की गई है। मगर हम अपने टैंकों की मदद से इन शहरों की किलाबंदी को तड़ रहे हैं। हम यूक्रेनी सेना की डिफ़ेन्स दीवार को तोड़ते और भीतर की ओर बढ़ते जा रहे हैं।......एक रूसी सैनिक बताता है कि इस सड़क पर आगे बढ़ना ख़तरनाक काम है। क्योंकि एंटी टैंक राकेट से हमला हो सकता है। यूक्रेन के सैनिकों की फ़ायरिंग की आवाज़ें सुनाई दे रही हैं। यह स्थिति दोनबास के इलाक़े की है। रूसी सैनिक अच्छा ख़ासा रास्ता टैंकों या गाडियों के बजाए पैदा तय करते हैं ताकि यूक्रेनी सैनिकों के हमले का निशाना न बनें।....रास्ते में बहुत सी जगहों पर दोनबास के वे सैनिक नज़र आते हैं जो रूस के वफ़ादार हैं। वे आठ साल से यूक्रेनी राष्ट्रवादियों से जंग कर रहे हैं। मोर्चों के भीतर होने वाली लड़ाई एक बार फिर यूरोप पहुंच गई है। रोज़ाना दर्जनों इंसान मारे जा रहे हैं और हथियारों के भंडार भरे हुए हैं।
यह चीज़ यह देखने में आई कि सारे मोर्चों पर बिल्लियों की बड़ी संख्या मौजूद है। सारे ही मोर्चों पर यह दृष्य है।.....आदिएफ़्का शहर नज़दीक है और इस शहर की ज़ोरदार क़िलाबंदी की गई है। इतनी अच्छी के सामने से इस पर हमला करना कठिन है। इसलिए रूसी सेना इस शहर के उत्तर में यूक्रेन की सेना को घेरने की कोशिश कर रही है। इसके बाद रूसी सेना आदिएफ़का पर नियंत्रण पाने की कोशिश करेगी। ....यूक्रेन का मीडिया और प्रशासन रूसी सेना को राक्षसों और पिशाचों के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है। इसका नतीजा यह हुआ कि जो रूसी सैनिक युद्ध में पकड़े गए यूक्रेन के लोगों ने उनके साथ बेरहमी का बर्ताव किया। मगर यह सच है कि रूसी सैनिकों में इंसानियत है। एक रूसी सैनिक ने पत्रकारों को देखा तो उनसे रिक्वेस्ट की कि रूसी सैनिकों के बारे में जो झूठा प्रोपैगंडा है उसकी हक़ीक़त दुनिया के सामने लाई जाए।.....यूक्रेन के रशियन स्पीकिंग इलाक़ों में क़त्ले आम हो रहा है। यूक्रेन की सेना इन लोगों को मार रही है। यूक्रेन आठ साले से हमारे लोगों पर बमबारी कर रहा है। वे हमें कुचल देना चाहते हैं, मैं यहां कभी भी मर सकता हूं मगर अपनी धरती पर मरना मेरे लिए गौरव की बात है। शायद बाद में हालात कुछ और हों लेकिन इस समय दोनबास के लिए लड़ाई जारी है।
प्रेस टीवी ब्योरो रिपोर्ट